‘अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया’: कोर्ट से बाहर आते ही बोले बृजभूषण शरण सिंह
महिला पहलवानों से छेड़छाड़ के केस में आरोप मुक्त करार दिए गए बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत ने निकले के बाद उन 6 महिला पहलावनों को लेकर बड़ा दिल दिखाया जिन्होंने आरोप लगाकर पूर्व सांसद के राजनीतिक करियर पर ब्रेक लगा दिया।
कानूनी जीत के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने आरोप लगाने वालीं महिला पहलवानों पर कुछ भी टिप्पणी करने इनकार किया। वह सिर्फ इतना कहकर आगे बढ़ चले कि, ‘जो हुआ सो हुआ।’
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने छह बार के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख रहे बृजभूषण शरण सिंह को सोमवार को उस केस में आरोप मुक्त करार दिया, जिसमें छह महिला पहलवानों ने उन पर छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे।

अदालत से निकलते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने इस बात को लेकर खुशी जाहिर की कि अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी किया। बृजभूषण सिंह ने दो बार कहा, ‘अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया है।’
मीडियाकर्मियों से घिरे बृजभूषण सिंह ने अपनी पुरानी चुनौती की याद दिलाते हुए कहा, ‘मैंने कहा था कि (यदि दोषी हुआ) फांसी पर लटक जाऊंगा। लेकिन वह नौबत नहीं आई। आज मैं कोर्ट से जा रहा हूं।’
पूर्व सांसद से बार-बार पूछा गया कि वह उन महिला पहलवानों के बारे में कुछ कहना चाहेंगे जिन्होंने उन पर आरोप लगाए थे और क्या उनके खिलाफ यह साजिश थी? इन दोंनों ही सवालों पर यूपी के दिग्गज नेता ने विवाद को यहीं खत्म करने की मंशा जाहिर करते हुए बस इतना ही कहा, ‘चलिए जो हुआ सो हुआ।’
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, ‘मेरे खिलाफ साजिश में पहलवानों के अलावा देश की ‘लेफ्ट-राइट’, कांग्रेस, आप, ममता… यानी दो एक पार्टियों को छोड़कर कोई बचा नहीं था। अब उनको अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उनके हिसाब से तो मुझे उसी दिन फांसी दे देना चाहिए था।
अब उनको देखना चाहिए कि उनका प्रोटेस्ट कहां तक सही था।’ पूर्व सांसद ने कहा कि वह कमजोरों के लिए लड़ते रहे हैं और इसलिए उन पर कई आरोप लगे। उन्होंने कहा, ‘किसी सोते को गफलत से जगा देना बगावत है, किसी कमजोर के हक को दिला देना बगावत है, अगर सच्चाइयों का गीत गाना बगावत है… तो हम भी बागी हैं, मेरा मजहब बगावत है।
यह लड़ाई भी जूनियर खिलाड़ियों, कमजोर खिलाड़ियों के लिए लड़ रहे थे। उसी कारण मुझ पर यह आरोप लगा। ये जो कथित पहलवान हैं, ओलंपियन, वर्ल्ड चैंपियन, ये जूनियर बच्चों का हक मार रहे थे। उनका हक उन बच्चों को मिले, इसलिए हमने कुछ नियम बनाए थे, इसको लेकर इनमें नाराजगी थी। इनके पीछे बहुत से लोग थे।’



