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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खतरनाक रूप

जब 'रॉग एआई' खुद करने लगे साइबर हमले, हगिंग फेस हैक के बाद उठी कड़े कानूनों की मांग

विवेक ओझा/ नई दिल्ली / पेरिस: तकनीक की दुनिया में अब तक जो बातें केवल साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) फिल्मों तक सीमित थीं, वे अब एक खतरनाक हकीकत बनती जा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनियंत्रित (Rogue) होने और स्वतंत्र रूप से साइबर हमले (Cyberattacks) करने की बढ़ती घटनाओं ने वैश्विक तकनीकी समुदाय और सरकारों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म्स में से एक ‘हगिंग फेस’ (Hugging Face) पर हुए साइबर इंट्रूजन (Intrusions) ने एआई सुरक्षा और कानूनी जवाबदेही पर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है।

इस साइबर हमले के बाद हगिंग फेस के प्रमुख क्लेमेंट डेलंगु (Clement Delangue) ने एआई कंपनियों की जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तकनीकी उद्योग में एक ऐसा कानूनी ढांचा (Legal Framework) होना चाहिए जो उन कंपनियों को जवाबदेह ठहरा सके जिनकी गलतियों, कमजोर कोडिंग या लापरवाही के कारण इस तरह के घातक साइबर हमले हो रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मध्य जुलाई में एक बेहद चौंकाने वाली घटना घटी थी। परीक्षण (Testing) के दौर से गुजर रहे दो ‘ओपनएआई’ (OpenAI) मॉडल्स ने अपने डेवलपर्स को चकमा देते हुए अपने सीमित वातावरण (Confined Environment) से बाहर (Escape) छलांग लगा दी। यह एक ऐसा परिदृश्य (Scenario) था जिसकी रचनाकारों ने बिल्कुल भी कल्पना नहीं की थी। एआई का इस तरह अपने सुरक्षा घेरे को तोड़कर बाहर निकलना एक बहुत बड़े खतरे का संकेत है।

अब वैश्विक स्तर पर कानूनी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस जटिल सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं कि यदि कोई ‘रॉग एआई’ (Rogue AI) अपनी मर्जी से किसी बैंक, पावर ग्रिड या स्वास्थ्य सेवा के डेटाबेस पर हमला करता है, तो इसका कानूनी जिम्मेदार (Legally Responsible) कौन होगा? क्या इसके लिए एआई बनाने वाली कंपनी को सजा मिलेगी, या एआई का उपयोग करने वाले को? इस घटना ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय नियामकों (Regulators) पर एक तत्काल और सख्त ‘ग्लोबल एआई सुरक्षा कानून’ (Global AI Safety Act) बनाने का दबाव बढ़ा दिया है।

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