डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा पर वैश्विक सख्ती: गूगल ने लागू किया ‘प्ले सिग्नल एपीआई’, ऑस्ट्रेलिया ने बनाए कड़े नियम

पल्लवी श्रीवास्तव/ कैलिफोर्निया / कैनबरा: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा (Child Online Safety) को लेकर दुनिया भर में विनियामक ढांचा बेहद सख्त होता जा रहा है। इसी कड़ी में टेक दिग्गज गूगल (Google) ने वैश्विक स्तर पर एंड्रॉयड ऐप डेवलपर्स के लिए अपनी नई ‘एज एश्योरेंस टेक्नोलॉजी’ यानी ‘प्ले सिग्नल एपीआई’ (Play Signal API) को अनिवार्य रूप से लागू करने की घोषणा की है। इस तकनीक के जरिए गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ऐप्स यह आसानी से सत्यापित कर सकेंगे कि यूजर बालिग है या नाबालिग, और उसी के अनुसार कंटेंट व विज्ञापनों को नियंत्रित किया जाएगा।
गूगल के इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन बुलिंग, अनुचित कंटेंट, गेमिंग एडिक्शन और डेटा प्राइवेसी के खतरों से बचाना है। नए नियमों के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए लोकेशन ट्रैकिंग, पर्सनलाइज्ड ऐड्स और इन-ऐप परचेज जैसे फीचर्स डिफ़ॉल्ट रूप से बंद रहेंगे। डेवलपर्स को अपने ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर पर बनाए रखने के लिए इस एज-वेरिफिकेशन एपीआई का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
समानांतर रूप से, ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भी बच्चों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए एक नया कड़ा कानून लागू किया है। ऑस्ट्रेलिया में अब बच्चों के साथ काम करने वाले या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नाबालिगों से जुड़ने वाले सभी कर्मचारियों व संगठनों के लिए ‘बैकग्राउंड चेकिंग सिस्टम’ (Working with Children Check) को बेहद कड़ा कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शारीरिक और डिजिटल सुरक्षा से समझौता करने वाली किसी भी टेक कंपनी या संस्था के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। भारत समेत कई अन्य देश भी इस तरह के वैश्विक कड़े कानूनों को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।



