CJP संसद मार्च: दिल्ली पुलिस ने वापस ली 13 एफआईआर, लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं को झेलनी पड़ रही है ‘ऑनलाइन डॉक्सिंग’

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित संसद मार्च और जंतर-मंतर पर हुए उग्र विरोध प्रदर्शनों के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा और सुलहपूर्ण कदम उठाया है। प्रशासन ने स्थिति को शांत करने और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 13 प्राथमिकियों (FIR) को वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए है। जिन व्यक्तियों पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जो पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी हिंसा में शामिल थे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
एफआईआर वापसी की राहत के बावजूद, इस प्रदर्शन में शामिल हुई महिलाओं के लिए एक नया और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जंतर-मंतर विरोध का हिस्सा बनीं कई युवा महिलाओं और छात्राओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। असामाजिक तत्वों द्वारा उनकी तस्वीरें, फोन नंबर और घर के पते इंटरनेट पर सार्वजनिक किए जा रहे हैं—जिसे साइबर भाषा में ‘डॉक्सिंग’ (Doxxing) कहा जाता है।
महिला अधिकार संगठनों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि महिलाओं की आवाज को दबाने के लिए धमकियों और चरित्र हनन का यह एक सुनियोजित तरीका बन गया है। दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और दिल्ली पुलिस की साइबर सेल से उन अकाउंट्स और हैंडल्स के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है जो इन महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।



