नीट यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: दाखिल की गई चार्जशीट, प्रश्नपत्रों के कोडनेम ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ का हुआ पर्दाफाश

अभिषेक सिंह नई दिल्ली: देश भर के लाखों मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े बहुचर्चित नीट यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़ा कदम उठाया है। महीनों की गहन जांच और देश के विभिन्न राज्यों में छापेमारी के बाद, सीबीआई ने आज विशेष अदालत में इस मामले की विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में शिक्षा माफियाओं और सॉल्वर गैंग के उस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है, जिसने इस राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा की शुचिता को तार-तार कर दिया था।
सीबीआई की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह है लीक हुए प्रश्नपत्रों की पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए कोडनेम। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा से एक रात पहले सॉल्वर गैंग द्वारा लीक किए गए नीट प्रश्नपत्रों के दो सेटों को ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ कोडनेम दिए गए थे। यह रणनीति इसलिए अपनाई गई थी ताकि फोन कॉल्स या मैसेजिंग ऐप्स पर बातचीत के दौरान पुलिस या खुफिया एजेंसियों को ‘पेपर’ या ‘नीट’ जैसे शब्दों से कोई शक न हो। “कैलाश पहुंच गया है” या “शिवालिक की तैयारी करो” जैसे कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करके गिरोह के सदस्यों ने लाखों रुपये के एवज में छात्रों तक प्रश्नपत्र और उनके उत्तर पहुंचाए थे।
दाखिल की गई सैकड़ों पन्नों की इस चार्जशीट में सीबीआई ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल्स और गिरफ्तार आरोपियों के कबूलनामे को आधार बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, पेपर को एक प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान किसी सुरक्षित जगह से लीक किया गया था, जिसके बाद इसे ‘सेफ हाउस’ में बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया गया। वहां से ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ नाम से तैयार किए गए उत्तरों को उन परीक्षार्थियों को रटाया गया, जिन्होंने इस सिंडिकेट को मोटी रकम चुकाई थी।
यह मामला केवल एक परीक्षा में धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि देश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल शिक्षा की साख से जुड़ा है। गौरतलब है कि इस पेपर लीक के खुलासे के बाद पूरे देश में छात्रों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इस खुलासे ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गए ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ के संदर्भ में सीबीआई की यह कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह संदेश देती है कि शिक्षा माफियाओं को अब बख्शा नहीं जाएगा।
विशेष अदालत अब इस चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू करेगी। देशभर के उन लाखों ईमानदार छात्रों और उनके अभिभावकों की निगाहें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जिन्होंने सालों की कड़ी मेहनत के बाद यह परीक्षा दी थी। उम्मीद जताई जा रही है कि ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ कोडनेम के पीछे छिपे सभी सफेदपोश चेहरों को जल्द ही उनके किए की कड़ी सजा मिलेगी।



