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जूडो में भारत का स्वर्णिम इतिहास: अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जीते भारत के पहले कॉमनवेल्थ गोल्ड

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ ग्लासगो / नई दिल्ली: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडोकाओं (Judokas) ने एक नया इतिहास रच दिया है। भारत ने इन खेलों में पहली बार जूडो में स्वर्ण पदक हासिल करने का गौरव प्राप्त किया है। महिलाओं की 48 किग्रा कैटेगरी में अस्मिता डे (Asmita Dey) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कनाडा की हेइडी क्वाच (Heidi Quach) को हराकर भारत के लिए जूडो इतिहास का पहला सीडब्ल्यूजी स्वर्ण पदक जीता।

अस्मिता की जीत के तुरंत बाद, पुरुषों की 60 किग्रा कैटेगरी में हर्ष सिंह (Harsh Singh) ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज (Joshua Katz) को मात दी और भारत के खाते में जूडो का दूसरा स्वर्ण पदक डाल दिया। वहीं, महिलाओं की 57 किग्रा स्पर्धा के फाइनल में भारत की यामिनी मौर्य (Yamini Maurya) को इंग्लैंड की एसेल्या टोप्राक (Acelya Toprak) के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। यह एक कड़ा और मैराथन मुकाबला था। महिलाओं की ही एक अन्य कैटेगरी में उन्नति शर्मा (Unnati Sharma) ने भी भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

हालांकि, सभी जूडोकाओं को सफलता नहीं मिली। महिला जूडोका इशरूप नारंग (Ishroop Narang) को कांस्य पदक के मुकाबले में निराशा हाथ लगी। वह ‘गोल्डन स्कोर’ राउंड में कनाडा की कोराली गॉडबाउट (Coralie Godbout) से हार गईं। इसके बावजूद, जूडो में भारत का यह अब तक का सबसे बेहतरीन और यादगार प्रदर्शन बन गया है।

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