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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ‘सरप्राइज एक्शन’: बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की कमान ली अपने हाथों में

अभिषेक सिंह/  भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में आज उस समय बड़ी हलचल मच गई, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य कैबिनेट में एक औचक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (Reshuffle) कर दिया। बिना किसी पूर्व सूचना के मुख्यमंत्री ने एक अधिसूचना जारी कर कैबिनेट मंत्री से ‘पशुपालन और डेयरी विकास विभाग’ (Animal Husbandry and Dairy Development) का प्रभार वापस ले लिया है और इसे सीधे तौर पर अपने अधीन कर लिया है।

मुख्यमंत्री के इस कदम के पीछे की रणनीति

  • राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम मोहन यादव का यह कदम केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को तेजी से बदलने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
  • श्वेत क्रांति का लक्ष्य: मध्य प्रदेश वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट विजन है कि अगले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश को ‘अमूल’ (गुजरात) की तर्ज पर डेयरी उत्पादन और सहकारी समितियों (Dairy Cooperatives) के मामले में देश का नंबर वन राज्य बनाया जाए।
  • किसानों की आय दोगुनी करना: खेती के साथ-साथ पशुपालन ही वह मुख्य जरिया है जिससे किसानों की आय को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री इस विभाग के जरिए नई सब्सिडी योजनाएं और उन्नत नस्ल की गायों के पालन के लिए सीधे नीतियां लागू करना चाहते हैं।
  • गौ-संरक्षण (Gau-Mata Conservation): सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशुओं की समस्या और गौशालाओं के सुचारू संचालन को लेकर मुख्यमंत्री विशेष रूप से गंभीर हैं। इस विभाग को अपने हाथ में लेकर वे गौ-संरक्षण के लिए बड़े फंड और ग्राम पंचायत स्तर पर नई गौशालाओं के निर्माण को फास्ट-ट्रैक करना चाहते हैं।

विपक्ष का तंज और आंतरिक खींचतान की चर्चा

इस अचानक हुए फेरबदल पर विपक्षी दल कांग्रेस ने चुटकी ली है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कदम राज्य सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच चल रही आंतरिक खींचतान (Internal Rift) और ‘अविश्वास’ का नतीजा है। कांग्रेस का कहना है कि सत्ता का केंद्रीकरण (Centralization of Power) कर मुख्यमंत्री यह जताना चाहते हैं कि राज्य में केवल उन्हीं की मर्जी चलती है।

हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री जल्द ही डेयरी सेक्टर में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश की घोषणा करने वाले हैं, जिसकी रूपरेखा वे स्वयं तैयार कर रहे हैं। इस फेरबदल ने राज्य के नौकरशाहों (Bureaucrats) को भी स्पष्ट संदेश दिया है कि ग्रामीण विकास की योजनाओं में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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