छत्तीसगढ़ में कोयला खनन को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, लेकिन जनसुनवाई कराने का भी दिया आदेश
रायपुर ( इंडियन व्यू टीम) : महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित गारे पालमा (सेक्टर-II) कोयला खदान में कंपनी को खनन जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) देने से पहले नई सिरे से जनसुनवाई कराना अनिवार्य था और यह प्रक्रिया अब हर हाल में पूरी की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा 15 जनवरी 2024 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें 11 जुलाई 2022 को इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी रद्द कर दी थी।
एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए नई जनसुनवाई से प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनजीटी के आदेश में प्रयुक्त “अफ्रेश” शब्द का स्पष्ट अर्थ है कि संबंधित अधिकारियों के लिए नई सिरे से जनसुनवाई (सार्वजनिक परामर्श) कराना अनिवार्य था। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए इस मामले में एनजीटी का फैसला सही नहीं माना जा सकता, कि केवल इसी आधार पर खनन पूरी तरह रोक दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि अधिकांश जरूरी शर्तों का पालन पहले ही किया जा चुका है, इसलिए महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को खनन जारी रखने की अनुमति दी जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इस वजह से कि अब तक नई जनसुनवाई नहीं हुई है, कंपनी के खनन कार्य में कोई बाधा नहीं आएगी।
हालांकि साथ ही, अदालत ने यह भी दोहराया कि पर्यावरणीय मंजूरी देने से पहले नई जनसुनवाई कराना आवश्यक था और इस प्रक्रिया को अब पूरा किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामला को आगे की कार्रवाई के लिए भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय पीठ को भेज दिया है। अदालत ने एनजीटी को निर्देश दिया कि वह नई जनसुनवाई कराए जाने की निगरानी करे और उसके बाद उचित आदेश पारित करे। साथ ही, यदि दोनों पक्षों ने अन्य मुद्दे भी उठाए हैं, तो एनजीटी उन पर भी गुण-दोष के आधार पर फैसला कर सकती है।
इस मामले में अब अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को एनजीटी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने का निर्देश भी दिया है।




