विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी, कांगो गणराज्य में खतरनाक रूप ले रहा इबोला
नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कांगो गणराज्य में इबोला का प्रकोप खतरनाक रूप से बढ़ रहा है और यह देश के इतिहास में सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन गया है। इससे पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 30 जुलाई तक इबोला के 3 हजार 605 पुष्ट मामले और 1587 मौतें दर्ज की गई हैं तथा मृत्यु दर 44 प्रतिशत है। महामारी विज्ञान के 30वें सप्ताह में 567 नए मामले हुए हैं और 296 मौतें हुईं, जो अब तक का सबसे बड़ा साप्ताहिक आंकड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यवाहक प्रमुख ने इस प्रकोप को अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला संकट बताया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस बीमारी पर अधिक ध्यान देने और मदद बढ़ाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि दुनिया को इस संकट को गंभीरता से देखने की जरूरत है, क्योंकि बीमारी बहुत तेजी से नए इलाकों में पहुंच रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस स्तर पर यह प्रकोप पिछले कई इबोला संक्रमणों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक घातक साबित हुआ है
दुर्लभ वायरस स्ट्रेन से बढ़ी चुनौती
इस बार कांगो में इबोला का प्रकोप वायरस के दुर्लभ ‘बुंदिबुग्यो स्ट्रेन’ के कारण फैल रहा है। इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई आधिकारिक रूप से स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने बीमारी को रोकने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
वैज्ञानिक इस वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने पर काम कर रहे हैं। बुंदिबुग्यो इबोला टीके का एक परीक्षण भी शुरू हो चुका है और एक स्वयंसेवक को इसकी पहली खुराक दी जा चुकी है। हालांकि टीके के प्रभाव और सुरक्षा को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।




