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विश्व पार्किंसन दिवस पर जानिए क्या है ये गंभीर पार्किंसन बीमारी

( विवेक ओझा ): आज विश्व भर में पार्किंसन रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व पार्किंसन दिवस ( World Parkinson’s Day) मनाया जा रहा है। यह तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क कोशिकाओं को प्रभावित करने वाला विकार है। इस अवसर पर, अखिल भारतीय आयुर्वेिज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने पार्किंसन रोग के बढ़ते प्रसार और प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। एम्स, इस महीने की 18 और 19 तारीख को इसके तहत वॉकथॉन और कई जन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा।

आपको बता दें कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) देश में पार्किंसन रोग के उपचार को नई दिशा देने की तैयारी में है। संस्थान अगस्त 2026 तक अत्याधुनिक फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (एफयूटी) से इसके उपचार की तैयारी की है। इसमें बिना चीरा-फाड़ वाली तकनीक से रोगी का उपचार किया जाएगा।
वर्तमान में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सबसे प्रभावी सर्जिकल विकल्प बना हुआ है, जो जटिल होने के बावजूद सुरक्षित और स्थापित है। एफयूटी में अल्ट्रासाउंड तरंगों से दिमाग के प्रभावित हिस्सों को बिना ऑपरेशन टारगेट किया जाता है, जिससे कंपकंपी में राहत मिलती है। यह प्रक्रिया करीब चार घंटे में पूरी हो सकती है और उन मरीजों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिनमें अन्य स्वास्थ्य जोखिम हैं।

पार्किंसन रोग अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। चिकित्सकों के अनुसार भारत में यह पहले से लगभग एक दशक पहले दिखने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि 30 से 40 वर्ष के लोग भी इसके लक्षणों के साथ सामने आ रहे हैं।50 वर्ष से कम उम्र के करीब 20 प्रतिशत मरीजों में जेनेटिक कारण जुड़े हो सकते हैं, हालांकि ‘जेनेटिक’ का मतलब हमेशा ‘वंशानुगत’ नहीं होता। संभावित कारणों में कीटनाशकों का संपर्क गट हेल्थ में बदलाव और एंटीऑक्सीडेंट की कमी शामिल मानी जा रही है। साथ ही स्लीप बिहेवियर डिसआर्डर (आरबीडी) को शुरुआती संकेत माना जा रहा है, जिसमें व्यक्ति नींद में असामान्य हरकतें करता है। चिकित्सक का कहना है कि समय रहते लक्षण पहचानना और सलाह लेना बेहद जरूरी है।

पारकिंसन रोग के लक्षण:

पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease) के मुख्य लक्षणों में आराम करते समय हाथ-पैर में कंपन (tremors), मांसपेशियों में अकड़न (rigidity), धीमी गति (bradykinesia), और संतुलन खोना शामिल हैं। शुरुआती लक्षणों में गंध महसूस न होना, कब्ज, नींद में परेशानी, और छोटे अक्षरों में लिखना शामिल हो सकते हैं। यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है।

कैसे होता है पारकिंसन रोग :

पार्किंसन रोग मस्तिष्क में डोपामाइन (dopamine) नामक केमिकल बनाने वाली तंत्रिका कोशिकाओं (neurons) के धीरे-धीरे नष्ट होने या मरने के कारण होता है। यह मुख्य रूप से मस्तिष्क के उस हिस्से (सबस्टैंशिया नाइग्रा)( Substantia nigra) को प्रभावित करता है जो गति को नियंत्रित करता है। जब 50-80% कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो डोपामाइन की कमी से कंपन, जकड़न और धीमी गति जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

पार्किंसंस रोग एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है और इसका कोई स्पष्ट कारण अभी नहीं पाया जा सका है। रिसर्च के अनुसार, यह बीमारी हर साल पूरी दुनिया में लगभग 10 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है। कुछ मामलों में आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारणों को पार्किंसंस रोग का कारण माना गया है। लेकिन स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ कारण जो डॉक्टर बताते हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • आयु: पार्किंसंस रोग ज्यादातर 60 साल की उम्र के बाद सामने आता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इस रोग के होने का जोखिम बढ़ता जाता है।
  • परिवार का इतिहास: अगर आपके परिवार में पहले किसी को यह बीमारी है तो आपको इसके होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
  • रसायनों का संपर्क: कुछ काम ऐसे होते हैं, जिनमें व्यक्ति हमेशा रसायनों के संपर्क में रहता है। ऐसे लोगों में यह बीमारी ज्यादा देखी गई है।
  • लिंग: शोध में पाया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को पार्किंसंस रोग कम प्रभावित करता है।

पारकिंसन रोग का उपचार और देखभाल :

पार्किंसन रोग का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं, सर्जरी और पुनर्वास (rehabilitation) सहित अन्य उपचारों के माध्यम से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।

लेवोडोपा/कार्बिडोपा (Levodopa/carbidopa) एक संयोजन दवा है जो मस्तिष्क में डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाती है, और यह पार्किंसन रोग (PD) के लिए सबसे आम दवा है। डॉक्टर अनैच्छिक मांसपेशियों की गति (involuntary muscle movement) को कम करने के लिए एंटीकोलिनर्जिक्स (anticholinergics) जैसी अन्य दवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (Deep brain stimulation) और अन्य उपचारों से कंपकंपी (tremors) को कम करने और दवाओं की आवश्यकता को घटाने में मदद मिल सकती है।
फिजियोथेरेपी सहित पुनर्वास (rehabilitation), पार्किंसन रोग और अन्य अपक्षयी तंत्रिका संबंधी विकारों (degenerative neurologic disorders) में राहत प्रदान कर सकता है।

  • इन उपचारों में शामिल हैं:
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (शक्ति प्रशिक्षण)
  • चाल और संतुलन प्रशिक्षण (gait and balance training)
  • हाइड्रोथेरेपी (जल चिकित्सा)
  • ये उपचार पार्किंसन से पीड़ित लोगों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। इससे देखभाल
  • करने वालों (carers) का तनाव भी कम हो सकता है।
  • कई दवाएं और सर्जिकल संसाधन हर जगह सुलभ, उपलब्ध या किफायती नहीं हैं, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में।

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