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उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग ने बहुध्रुवीय विश्व के लिए चीन के प्रयासों का किया समर्थन

( विवेक ओझा): वर्तमान भू राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में शक्ति समीकरणों को इस रूप में बनाने की कवायद चल रही है जिससे देशों के अपने सामरिक, सुरक्षा और आर्थिक हितों को नुकसान न पहुंचे। उत्तर कोरिया और चीन की इस संबंध में दोस्ती और नजदीकी जगजाहिर है और अब किम जोंग उन ने कुछ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर उत्तर कोरिया के रुख पर जोर दिया और वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में चीन और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने बताया है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने “बहुध्रुवीय विश्व” (multipolar world) के निर्माण के लिए चीन के प्रयासों का समर्थन किया है और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक के दौरान पारंपरिक सहयोगियों के बीच गहरे संबंधों का आह्वान किया है। उत्तर कोरिया की आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (KCNA) के अनुसार 10 अप्रैल को हुई बैठक के दौरान मिस्टर किम ने कहा कि उनकी सरकार अपने “एक-चीन सिद्धांत” (one-China principle) के आधार पर क्षेत्रीय अखंडता हासिल करने के चीनी प्रयासों का पूर्ण समर्थन करेगी। यह बीजिंग के उस आधिकारिक रुख का संदर्भ है कि ताइवान, चीन के क्षेत्र का एक अभिन्न अंग है।

उत्तर कोरिया का आक्रामक रुख :

एक तरह दुनिया ईरान अमेरिका और और इजरायल लेबनान युद्धों के खात्मे का इंतजार कर रही है वहीं उत्तर कोरिया के किम जोंग जान बूझकर कोरिया प्रायद्वीप में अशांति उपद्रव बढ़ाने में लगे हैं। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ मिसाइलें भी दागीं हैं और हाल में उत्तर कोरिया ने कार्बन फाइबर बम ( Carbon Fiber Bomb) भी तैयार कर लिया है, जो बिजली ग्रिड को तबाह करने के लिए जाना जाता है। इसे ब्लैक आउट बम भी कहा जाता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया ने कई नए हथियारों के टेस्ट किए हैं। सरकारी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (KCNA) ने बताया कि इनमें मुख्य रूप से एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हथियार सिस्टम और एक कार्बन फाइबर बम शामिल हैं। ये टेस्ट सोमवार से बुधवार तक तीन दिनों तक चले है। कार्बन फाइबर बम किसी देश के पावर प्लांट पर हमला करके पूरे अंधेरे में डुबो सकता है। ये एक जानलेवा बम नहीं है। इसे ग्रेफाइट बम ( Graphite bomb) और ब्लैक आउट बम ( Black out Bomb) के नाम से भी जाना जाता है। यह बम बिजली के संयंत्रों पर फटता है और रासायनिक रूप से उपचारित कार्बन फिलामेंट्स फैला देता है, जिससे शॉर्ट सर्किट हो जाता है। ग्रिड तबाह हो जाता है और लंबे समय तक बिजली सप्लाई बाधित हो जाता है और वह भी बिना इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह किए।
उत्तर कोरिया इस तरह की कार्यवाही के जरिए आतंक का संतुलन बनाए रखना चाहता है जिसका लाभ एक लाबी और नेक्सेस के रूप में चीन को भी मिलेगा।

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