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एनआईए अदालत ने मानव तस्करी मामले में चार बांग्लादेशी नागरिकों को सुनाई सजा

( विवेक ओझा) : आतंकवाद, आतंकवादियों, संगठित अपराध का नेटवर्क को तोड़ने के लिए सक्रिय भारत की विशेष संस्था राष्ट्रीय जांच अभिकरण ( National Investigation agency) ने एक बार फिर अपनी सक्रियता का सबूत दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक विशेष अदालत ने सीमा पार मानव तस्करी के एक मामले में चार बांग्लादेशी नागरिकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
दोषी करार दिए गए अभियुक्तों — ज़ाकिर खान, बादल हलदार, कबीर तालुकदार और मोहम्मद बच्चू घरामी — को बेंगलुरु की एनआईए विशेष अदालत ने तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने उनमें से प्रत्येक पर ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया है, और जुर्माना न भरने की स्थिति में एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा का प्रावधान किया है।

आतंकवाद के विभिन्न स्वरूपों और उसके संगठित अपराधों से लिंक को तोड़ने के मकसद से ही पिछले साल एनआईए संशोधन अधिनियम , 2019 में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को आतंकी मामलों से निपटने के साथ ही साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों , जाली मुद्रा कारोबार से जुड़े अपराधों, विस्फोटक पदार्थ से जुड़े अपराधों , मानव तस्करी से जुड़े मामलों , जॉच का अधिकार क्षेत्र विदेशों तक बढ़ाने और ऐसे व्यक्तियों को भी जांच के घेरे में रख सकने का अधिकार दिया गया है, जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के खिलाफ या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला अनुसूचित अपराध करते हैं। ऐसे विधायन का महत्व तब समझ में आता है जब देश के सामने आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों के पेशेवर आतंकियों द्वारा भारत में साइबर अपराधों में लिप्त होकर देश में धार्मिक कट्टरता के लिए हिंसा को ऑनलाईन वैधता देते हुए पाया जाता है जैसा की उपरोक्त नए मामले में पाया भी गया है।

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