महंगाई की मार से बेहाल आम आदमी
पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी (CNG) के दाम में लगी आग, 2 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी वृद्धि

देश के आम आदमी की जेब पहले ही पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबी हुई थी, लेकिन अब महंगाई ने एक और बड़ा झटका दे दिया है। सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाने वाली सीएनजी (Compressed Natural Gas – CNG) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी वृद्धि कर दी गई है। यह बढ़ी हुई कीमत आज मध्यरात्रि से देश के कई प्रमुख शहरों में लागू हो गई है। इस वृद्धि का सीधा असर कैब, ऑटो-रिक्शा और माल ढुलाई के किरायों पर पड़ना तय है।
मध्यम वर्ग और रोजमर्रा की यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए आज एक और बुरी खबर सामने आई। देश की प्रमुख गैस वितरण कंपनियों (Gas Distribution Companies) जैसे इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) और महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव का हवाला देते हुए घरेलू सीएनजी गैस की कीमतों में अचानक 2 रुपये प्रति किलो का सीधा इजाफा कर दिया है।
क्या हैं महानगरों में नए दाम?
इस नई मूल्य वृद्धि के बाद, देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में सीएनजी की नई कीमत बढ़कर 78 रुपये प्रति किलोग्राम के पार हो गई है। इसी तरह आर्थिक राजधानी मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर जैसे शहरों में भी गैस के दाम आसमान छूने लगे हैं। पिछले 6 महीनों के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो सीएनजी की कीमतों में यह चौथी बार वृद्धि हुई है, जिससे गैस से चलने वाले वाहन (CNG Vehicles) रखने का आकर्षण तेजी से खत्म हो रहा है।
गैस कंपनियों का क्या है तर्क?
कीमतों में इस भारी उछाल पर गैस वितरण कंपनियों ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि ‘घरेलू गैस आवंटन’ (Domestic Gas Allocation) में भारी कमी आई है। देश के गैस भंडारों से मिलने वाली सस्ती गैस की आपूर्ति घट गई है, जिसके कारण कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का आयात (Import) करना पड़ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी आयात को और अधिक महंगा कर दिया है, जिसका सीधा बोझ अंततः ग्राहकों पर डाला गया है।
ऑटो और कैब किरायों में होगी वृद्धि
इस सीएनजी वृद्धि का सबसे ज्यादा और तत्काल असर सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) पर पड़ेगा। ओला-उबर (Ola-Uber) चलाने वाले कैब चालकों और ऑटो-रिक्शा यूनियनों ने चेतावनी दी है कि वे इतने महंगे ईंधन पर गाड़ियां नहीं चला सकते। कई प्रमुख टैक्सी यूनियनों ने सरकार से अपना ‘बेस फेयर’ (Base Fare) यानी न्यूनतम किराया बढ़ाने की मांग कर दी है। इसका सीधा अर्थ है कि अब आम आदमी को घर से दफ्तर जाने के लिए और अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
महंगाई का चक्रव्यूह और जनता का गुस्सा
सीएनजी केवल यात्री गाड़ियों में ही नहीं, बल्कि छोटे मालवाहक वाहनों (Light Commercial Vehicles) में भी भारी मात्रा में इस्तेमाल होती है। माल ढुलाई (Freight) महंगी होने से फल, सब्जियों और दूध जैसी दैनिक आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ना भी तय है। आम जनता इस लगातार बढ़ती महंगाई से त्रस्त (Frustrated) है।
एक तरफ सरकार लोगों को प्रदूषण कम करने के लिए सीएनजी वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित (Encourage) करती है, वहीं दूसरी तरफ गैस की कीमतें पेट्रोल और डीजल के बराबर पहुंचती जा रही हैं। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और मांग की है कि सीएनजी पर लगने वाले करों (Taxes) में तुरंत कटौती की जाए ताकि आम आदमी को कुछ राहत मिल सके।



