होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित शिपिंग पर बनी सहमति
ओमान की मध्यस्थता से वार्ता में भारी प्रगति, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की पुष्टि
विवेक ओझा/ मस्कट / वाशिंगटन: वैश्विक तेल व्यापार की जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रहे भारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ओमान (Oman) और ईरान के बीच सुरक्षित शिपिंग को लेकर चल रही बैक-चैनल वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने इस घटनाक्रम की आधिकारिक रूप से पुष्टि की है, जिससे मध्य-पूर्व में एक संभावित युद्ध का खतरा कुछ हद तक टलता हुआ नजर आ रहा है।
पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक और मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर गंभीर संकट पैदा हो गया था। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। सूत्रों के अनुसार, ओमान के सुल्तान के विशेष दूतों की मध्यस्थता में चल रही इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस अहम कॉरिडोर को युद्ध क्षेत्र बनने से रोकना है।
प्रस्तावित समझौते के मसौदे के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक नया नेविगेशन प्रोटोकॉल तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत, कमर्शियल जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने के लिए ईरान द्वारा नियंत्रित समुद्री मार्ग का उपयोग करेंगे, और बाहर निकलने के लिए ओमान द्वारा नियंत्रित मार्ग से सुरक्षित पार होंगे। इसके बदले में, जहाजों को सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए एक निश्चित ‘सर्विस फीस’ (Service Fee) चुकानी होगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वाशिंगटन इस ओमान-ईरान वार्ता की प्रगति का बारीकी से समर्थन और अवलोकन कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ईरान इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) की गारंटी देता है, तो अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए कड़े आर्थिक और समुद्री ब्लॉकेड (US Blockade) को धीरे-धीरे हटाने पर विचार कर सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ईरान समर्थित गुटों द्वारा लगातार क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी माना है कि ओमान के साथ होर्मुज के रास्ते को सुरक्षित करने के लिए उनकी गंभीर बातचीत चल रही है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार संगठनों और तेल उत्पादक देशों ने इस संभावित समझौते का स्वागत किया है, क्योंकि इससे वैश्विक तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल कायम होगा।