नीति आयोग की अहम बैठक आज: पीएम मोदी करेंगे ‘विकसित भारत 2047’ के रोडमैप पर मंथन, कई राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल
राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग (NITI Aayog) की गवर्निंग काउंसिल की 10वीं अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा ‘विकसित भारत @2047’ (Viksit Bharat @2047) के विजन को साकार करने के लिए एक ठोस और साझा रोडमैप तैयार करना है। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट के प्रमुख मंत्रियों के साथ-साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल (Lieutenant Governors) हिस्सा ले रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आज की इस मैराथन बैठक में मुख्य रूप से पांच प्रमुख विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी: कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का आधुनिकीकरण, स्वास्थ्य और पोषण के बुनियादी ढांचे में निवेश, कौशल विकास (Skill Development) और महिला सशक्तिकरण। प्रधानमंत्री मोदी अपने उद्घाटन भाषण में राज्यों से ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) की भावना के साथ काम करने और राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य-स्तरीय नीतियों को संरेखित (Align) करने का आह्वान करेंगे।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने बताया कि 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल नितांत आवश्यक है। राज्यों को अपने यहां निवेश का अनुकूल माहौल बनाने, लालफीताशाही कम करने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विशेष रूप से विनिर्माण (Manufacturing) और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों पर मुख्यमंत्रियों से सुझाव मांगे गए हैं।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक पर भी राजनीति का साया मंडरा रहा है। कुछ विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने संघीय ढांचे के उल्लंघन और केंद्रीय धन के आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए इस बैठक का बहिष्कार (Boycott) करने का संकेत दिया है। वहीं, जो विपक्षी मुख्यमंत्री शामिल हो रहे हैं, वे मनरेगा फंड, जीएसटी मुआवजे के बकाये और राज्य-विशिष्ट परियोजनाओं के लिए विशेष पैकेज की मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। इन राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, यह बैठक भारत के दीर्घकालिक आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।