पश्चिमी दबाव दरकिनार: भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात रखा जारी
जुलाई में रिकॉर्ड 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंचा आंकड़ा
अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: अमेरिका और पश्चिमी देशों के भारी कूटनीतिक दबाव तथा प्रतिबंधों की धमकियों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात जारी रखा है। ऊर्जा ट्रैकिंग और वैश्विक अनुसंधान एजेंसी केप्लर (Kpler) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। भारत ने जुलाई में रूस से 2.6 से 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन (mbd) कच्चा तेल खरीदा है, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बन गया है।
यह भारी वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वाशिंगटन (अमेरिका) एक ऐसा कड़ा कानून लाने पर विचार कर रहा है जो मॉस्को से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ (Tariffs) लगा सकता है। हालांकि, भारतीय रणनीतिकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे भू-राजनीतिक दबावों के आगे नहीं झुकेंगे। केप्लर के प्रमुख विश्लेषकों का कहना है कि मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष और अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandab) के बंद होने या बाधित होने की आशंका ने नई दिल्ली को रिकॉर्ड मात्रा में रूसी तेल खरीदने के लिए प्रेरित किया है।
इससे पहले, वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति सीमित होने और कीमतों में उछाल को रोकने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों (Sanctions) में कई बार अस्थायी छूट दी थी। लेकिन 19 जून 2026 को वाशिंगटन ने इस छूट को समाप्त कर दिया। इसके बावजूद, भारतीय रिफाइनरियों ने जून के 2.73 mbd के मुकाबले जुलाई में रूसी तेल की खरीद में और वृद्धि कर दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से रियायती दरों (Discounted Rates) पर मिल रहे कच्चे तेल ने भारत को भारी विदेशी मुद्रा बचाने और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में बड़ी मदद की है। जनवरी 2026 में रूस की हिस्सेदारी भारत के आयात में 23.4 प्रतिशत थी, जो अब दोगुनी से अधिक होकर 55 प्रतिशत के पार जा चुकी है। भारत का यह अडिग रुख अंतरराष्ट्रीय पटल पर उसकी स्वतंत्र और राष्ट्रीय हित-संचालित विदेश नीति का एक मजबूत प्रमाण पेश कर रहा है।