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यूरोपीय संघ ने कसा मेटा (Meta) पर शिकंजा: फेसबुक और इंस्टाग्राम के नए विज्ञापन एल्गोरिदम की जांच शुरू

विवेक ओझा/ ब्रसेल्स: दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा के खिलाफ एक बड़ी और विस्तृत एंटीट्रस्ट जांच शुरू कर दी है। यह जांच मुख्य रूप से फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर विज्ञापनों को लक्षित (Target) करने के लिए उपयोग किए जा रहे नए एल्गोरिदम और डेटा संग्रह प्रथाओं को लेकर है। यूरोपीय आयोग का मानना है कि मेटा की नई नीतियां यूरोपीय संघ के सख्त ‘डिजिटल मार्केट एक्ट’ (DMA) और ‘डिजिटल सर्विस एक्ट’ (DSA) का उल्लंघन कर सकती हैं।

क्या है पूरा विवाद?

मेटा ने हाल ही में यूरोप में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए “पे ऑर कंसेंट” (Pay or Consent) मॉडल पेश किया था। इसके तहत, उपयोगकर्ताओं को या तो विज्ञापन-मुक्त अनुभव के लिए मासिक सदस्यता शुल्क का भुगतान करना होता है, या फिर व्यक्तिगत विज्ञापनों (Personalized Ads) के लिए अपने डेटा के उपयोग की सहमति देनी होती है। यूरोपीय संघ के नियामकों का तर्क है कि यह मॉडल उपयोगकर्ताओं को अपना डेटा सौंपने के लिए अनुचित रूप से मजबूर करता है और उन्हें ‘स्वतंत्र विकल्प’ प्रदान नहीं करता है।

जांच के प्रमुख बिंदु:

* एल्गोरिदम की पारदर्शिता: आयोग यह जांच कर रहा है कि मेटा का नया एल्गोरिदम उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन गतिविधियों को किस हद तक ट्रैक करता है।
* डेटा का व्यावसायिक उपयोग: क्या मेटा अपने प्रतिस्पर्धियों को नुकसान पहुंचाने और डिजिटल विज्ञापन बाजार में अपना एकाधिकार (Monopoly) बनाए रखने के लिए इस डेटा का उपयोग कर रहा है?
* नाबालिगों की सुरक्षा: इंस्टाग्राम पर बच्चों और किशोरों को दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का स्वरूप क्या है और क्या यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है?

अगर मेटा इस जांच में दोषी पाया जाता है, तो कंपनी पर उसके वैश्विक वार्षिक टर्नओवर का 10% तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जांच वैश्विक स्तर पर बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यूरोपीय संघ का यह कदम डिजिटल विज्ञापन की दुनिया के भविष्य को किस तरह आकार देगा।

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