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डिजिटल इंडिया बिल: सरकार ने आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लेने की समयसीमा 15 दिन बढ़ाई

राघवेंद्र प्रताप सिंह/  नई दिल्ली: भारत के तेजी से बदलते तकनीकी और डिजिटल परिदृश्य को विनियमित करने के लिए सरकार जिस नए ‘डिजिटल इंडिया बिल’ (Digital India Bill) को लाने की तैयारी कर रही है, उस पर एक अहम फैसला लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय ने इस नए बिल के मसौदे पर आम जनता, तकनीकी विशेषज्ञों, नागरिक अधिकार समूहों और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और फीडबैक प्राप्त करने की समयसीमा को 15 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है।

समयसीमा बढ़ाने का कारण

आईटी मंत्रालय का मानना है कि यह बिल भारत के 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर्स के अधिकारों और सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है। बड़ी टेक कंपनियों (Big Tech), स्टार्टअप्स और नागरिक समाज की तरफ से इस बिल के कुछ कड़े प्रावधानों पर और अधिक चर्चा करने का अनुरोध किया गया था। सरकार का उद्देश्य है कि बिना किसी जल्दबाजी के एक ऐसा कानून बनाया जाए जो नवाचार (Innovation) को बढ़ावा दे और साथ ही यूजर्स की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

डिजिटल इंडिया बिल की खास बातें:

यह नया बिल साल 2000 में बने पुराने आईटी एक्ट (IT Act 2000) की जगह लेगा, जो वर्तमान की तकनीकी चुनौतियों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
* डीपफेक और AI का नियमन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान।
* सोशल मीडिया की जवाबदेही: फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियम, ताकि हेट स्पीच और फेक न्यूज को तेजी से हटाया जा सके।
* यूजर प्राइवेसी: डेटा चोरी होने पर टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाना।
* एल्गोरिदम में पारदर्शिता: कंपनियों को यह बताना होगा कि वे यूजर्स को विज्ञापन दिखाने के लिए उनके डेटा का उपयोग किस तरह कर रही हैं।

डिजिटल इंडिया बिल भारत को वैश्विक इंटरनेट गवर्नेंस के मामले में एक नई दिशा देने वाला कानून साबित होगा। नई समयसीमा के बाद, सरकार इस बिल को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है।

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