साइबर फ्रॉड पर नकेल कसने की तैयारी: व्हाट्सएप भारत में ला रहा है AI आधारित ‘फ्लैगिंग सिस्टम’, फर्जी यूज़रनेम की होगी पहचान

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल ठगी के मामलों को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) की सख्ती का अब बड़ा असर दिखने लगा है। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कड़े नोटिस के जवाब में दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ‘व्हाट्सएप’ (WhatsApp) ने आश्वस्त किया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए एक अत्याधुनिक, एआई-आधारित ‘फ्लैगिंग सिस्टम’ (AI-based Flagging System) लागू कर रहा है। यह नया सिस्टम विशेष रूप से उन स्कैमर्स को लक्षित करेगा जो फर्जी ‘यूज़रनेम’ और डीपी (DP) का उपयोग कर आम नागरिकों को अपना शिकार बनाते हैं।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
पिछले कुछ समय से देखा गया है कि साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, या किसी कंपनी के सीईओ की फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को डराते हैं या निवेश का लालच देते हैं। व्हाट्सएप की मूल कंपनी ‘मेटा’ (Meta) के अनुसार, नया एआई सिस्टम यूज़र्स की ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ (End-to-End Encryption) को तोड़े बिना काम करेगा।
* यह एआई मुख्य रूप से ‘व्यवहार संबंधी पैटर्न’ (Behavioral Patterns) का विश्लेषण करेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई नया अकाउंट अचानक एक ही दिन में सैकड़ों अनजान नंबरों को मैसेज भेजता है या अंतर्राष्ट्रीय नंबरों से भारी मात्रा में वॉइस कॉल करता है, तो एआई तुरंत उसे संदिग्ध मानकर ‘फ्लैग’ (Flag) कर देगा।
* फ्लैग होने के बाद सिस्टम यूज़र को स्क्रीन पर एक बड़ा लाल चेतावनी संदेश (Warning Alert) दिखाएगा कि “यह सेंडर संदिग्ध हो सकता है, कृपया व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।”
सरकार की डेटा लोकलाइजेशन की मांग
आईटी मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि भारत के 50 करोड़ से अधिक व्हाट्सएप यूज़र्स की सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार ने यह भी शर्त रखी थी कि यह जो भी एआई विश्लेषण होगा, उसका डेटा भारत के भीतर स्थित सर्वरों (Data Localization) पर ही प्रोसेस होना चाहिए। व्हाट्सएप ने अपने जवाब में कहा है कि वह भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है और स्थानीय नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों ने व्हाट्सएप के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि अधिकांश साइबर अपराध केवल इसलिए सफल होते हैं क्योंकि पीड़ित व्यक्ति धोखेबाजों की फर्जी प्रोफाइल पर भरोसा कर लेता है। एआई द्वारा रियल-टाइम में चेतावनी मिलने से ‘इम्पर्सनेशन’ (Impersonation) या पहचान चुराने वाले अपराधों में भारी कमी आएगी। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ हफ्तों में यह नया सुरक्षा अपडेट सभी भारतीय यूज़र्स के स्मार्टफोन्स में रोलआउट हो जाएगा।



