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20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘वक्फ संशोधन बिल’ पर सरकार की नजर

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: 20 जुलाई 2026 से संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इस सत्र को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। संसदीय कार्य मंत्रालय और सरकार सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सर्वदलीय बैठक की तैयारियों में जुटे हुए हैं। सूत्रों के हवाले से यह साफ हो गया है कि यह सत्र ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि केंद्र सरकार इसमें कई ऐसे अहम और दूरगामी प्रभाव वाले विधेयक पेश करने की रूपरेखा तैयार कर रही है, जो देश की राजनीतिक और सामाजिक दिशा को बदल सकते हैं।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की ओर बड़ा कदम

इस सत्र का सबसे बड़ा आकर्षण ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) बिल हो सकता है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के बाद, सरकार इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। सरकार का तर्क है कि देश में हर साल होने वाले चुनावों से विकास कार्य बाधित होते हैं और सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए इसका कड़ा विरोध करने का मन बना लिया है।

वक्फ अधिनियम में संशोधन की तैयारी

मानसून सत्र का दूसरा सबसे ज्वलंत मुद्दा ‘वक्फ संशोधन बिल’ होने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। नए संशोधन के तहत वक्फ बोर्ड की शक्तियों को सीमित करने और संपत्तियों के विवादों को तेजी से सुलझाने के लिए नए ट्रिब्यूनल के गठन का प्रस्ताव रखा जा सकता है।

सत्र से जुड़ी मुख्य बातें:

* सर्वदलीय बैठक: सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सरकार सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर एजेंडा साझा करेगी।
* विपक्ष की रणनीति: विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) नीट (NEET) धांधली, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
* अन्य अहम बिल: इन दोनों प्रमुख बिलों के अलावा, डिजिटल इंडिया बिल और नए श्रम सुधारों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी पटल पर रखे जा सकते हैं।

“सरकार का लक्ष्य इस सत्र में अधिकतम विधायी कार्य पूरे करना है, लेकिन इसके लिए विपक्ष का रचनात्मक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।” – संसदीय कार्य मंत्रालय सूत्र

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