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गुजरात में बाढ़ का कहर थमते ही महामारी का खतरा

राज्य सरकार ने मोर्चा संभाला, 6,868 मेडिकल कैंप और 18,000 सर्विलांस टीमें मैदान में उतरीं

सरिता त्रिपाठी/ गांधीनगर / अहमदाबाद: गुजरात के कई जिलों में हाल ही में आई मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के बाद बाढ़ का पानी तो धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन अब राज्य के सामने जलजनित (Water-borne) और वेक्टर जनित (Vector-borne) बीमारियों का एक बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जलजमाव, दूषित पेयजल और चारों तरफ फैली गंदगी के कारण हैजा, डायरिया, टाइफाइड, डेंगू और मलेरिया जैसी महामारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए गुजरात सरकार ने पूरे राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल जैसी युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सबसे अधिक प्रभावित जिलों—वडोदरा, सूरत, भरूच, जामनगर, जूनागढ़ और राजकोट में अभूतपूर्व स्वास्थ्य राहत अभियान शुरू किया है। मुख्य सचिव और स्वास्थ्य आयुक्त की सीधी निगरानी में राज्य भर में 6,868 विशेष मेडिकल कैंप (Special Health Camps) स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में बाढ़ प्रभावित ग्रामीण और शहरी आबादी की मुफ्त चिकित्सा जांच की जा रही है और उन्हें ओआरएस (ORS) के पैकेट, एंटीबायोटिक्स, जिंक सप्लीमेंट्स और त्वचा संक्रमण की दवाइयां बांटी जा रही हैं।

इसके साथ ही, बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पकड़ने और उनका तुरंत इलाज करने के लिए 18,000 से अधिक पैरामेडिकल स्टाफ और एएनएम (ANM) कार्यकर्ताओं वाली हेल्थ सर्विलांस टीमें (Surveillance Teams) मैदान में उतारी गई हैं। ये टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रही हैं, पीने के पानी के स्रोतों की क्लोरिनेशन (Chlorination) जांच कर रही हैं और बुखार या पेट की बीमारी से पीड़ित मरीजों को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचा रही हैं। पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए अब तक 25 लाख से अधिक हैलोजन गोलियां (Halogen Tablets) बांटी जा चुकी हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री ने गांधीनगर में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में शहरी विकास और पंचायती राज विभागों को निर्देश दिया है कि पानी उतरते ही ब्लीजिंग पाउडर के छिड़काव, फॉगिंग (Fogging) और मलबे की सफाई का काम 24 घंटे के भीतर पूरा किया जाए। जलजमाव वाले स्थानों पर मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए विशेष कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। वडोदरा और सूरत के अस्पतालों में अतिरिक्त बेड आरक्षित किए गए हैं और डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के बाद का अगला 15 दिन राज्य के लिए बेहद संवेदनशील है। यदि सफाई और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो बीमारियां महामारी का रूप ले सकती हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और रेड क्रॉस के सहयोग से राहत सामग्री के साथ-साथ स्वच्छ भोजन और उबले हुए पानी के उपयोग को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। फिलहाल सरकार का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।

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