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दतिया उपचुनाव में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में बड़ा एक्शन

स्थानीय जिला इकाई भंग, हार की समीक्षा के लिए 2-सदस्यीय जांच कमेटी गठित

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ भोपाल / दतिया: मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर हाल ही में हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिली अचानक और करारी हार के बाद पार्टी संगठन में हड़कंप मच गया है। चुनाव परिणामों के विश्लेषण और स्थानीय कार्यकर्ताओं के असंतोष को देखते हुए मध्य प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी और स्थानीय सांगठनिक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इसके साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस शर्मनाक पराजय के आंतरिक कारणों की जांच के लिए दो सदस्यीय उच्च स्तरीय समीक्षा समिति का गठन किया है।

दतिया उपचुनाव को प्रदेश की राजनीति में एक साख की लड़ाई माना जा रहा था, जहां भाजपा ने अपने सबसे मजबूत दावेदारों में से एक को मैदान में उतारा था। हालांकि, मतगणना के दिन सामने आए नतीजों ने पार्टी आलाकमान को झकझोर कर रख दिया, जब विपक्षी उम्मीदवार ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर गुटबाजी (Internal Factionalism), स्थानीय नेताओं द्वारा किया गया भितरघात (Cross-voting/Sabotage), और प्रत्याशी चयन को लेकर कार्यकर्ताओं में पनपा भारी असंतोष इस हार की मुख्य वजह बना।

भोपाल में आयोजित एक आपात बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से कड़े फैसले का ऐलान किया। पार्टी द्वारा गठित दो सदस्यीय समीक्षा समिति में राज्य सरकार के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष को शामिल किया गया है। यह समिति अगले तीन दिनों के भीतर दतिया का दौरा करेगी और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं, स्थानीय प्रतिनिधियों और चुनाव प्रभारियों से बंद कमरे में अलग-अलग मुलाकात कर रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह उन प्रमुख नेताओं की पहचान करे जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लिया या निष्क्रिय रहे।

भाजपा के इस कड़े कदम से पूरे प्रदेश संगठन में एक सख्त संदेश गया है कि पार्टी अनुशासनहीनता और भितरघात को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति की गोपनीय रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जाएगा। दतिया जिला इकाई के भंग होने के बाद जल्द ही वहां नए और समर्पित कार्यकर्ताओं को शामिल कर तदर्थ (Ad-hoc) समिति की घोषणा की जाएगी।

दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा के इस कदम पर तंज कसते हुए कहा है कि दतिया की हार केवल एक जिला इकाई की विफलता नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों और अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा है। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश की जनता का भाजपा से मोहभंग हो चुका है और दतिया का परिणाम आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक मिजाज का स्पष्ट संकेत है। फिलहाल भाजपा की जांच समिति की दतिया यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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