राष्ट्रमंडल खेलों में टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत बना सामूहिक आत्मविश्वास
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन केवल पदक तालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय दल के भीतर जीत की एक ऐसी संस्कृति विकसित कर रहा है, जिसमें हर सफलता पूरे दल का आत्मविश्वास बढ़ा रही है। किसी एक खिलाड़ी की उपलब्धि दूसरे खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बन रही है और यही सामूहिक भावना टीम इंडिया को एकजुट रखते हुए बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
भारतीय अभियान की शुरुआत पैरा पावर लिफ्टिंग में पदक के साथ हुई। इसके बाद भारोत्तोलन में शानदार प्रदर्शन, पैरा शॉटपुट में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक तथा एथलेटिक्स में रजत पदक ने भारत के अभियान को नई गति दी। इन उपलब्धियों ने पूरे भारतीय दल के भीतर यह विश्वास और मजबूत किया है कि सामूहिक प्रयास और सकारात्मक माहौल से बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं।
ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने एक बार फिर भारोत्तोलन में भारत का नेतृत्व किया, जबकि ज्ञानेश्वरी देवी, बिंदिया रानी देवी और उनके साथियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की मजबूत पहचान को और सुदृढ़ किया। इन खिलाड़ियों की सफलता ने केवल पदकों की संख्या में इजाफा नहीं किया, बल्कि पूरे भारतीय दल के मनोबल को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

एथलेटिक्स में सर्वेश कुशारे ने पुरुष ऊंची कूद में रजत पदक जीतकर भारतीय अभियान को और मजबूती दी। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हासिल की गई उनकी सफलता ने एथलेटिक्स दल का उत्साह बढ़ाया है। अब सभी की निगाहें नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर और तेजस्विन शंकर जैसे खिलाड़ियों पर हैं, जिनकी तैयारियों को भी साथी खिलाड़ियों की उपलब्धियां प्रेरित कर रही हैं।
पैरा खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शॉटपुट में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम किया। इन उपलब्धियों का पूरे भारतीय दल ने समान उत्साह के साथ स्वागत किया, जिससे यह संदेश गया कि सक्षम और पैरा खिलाड़ी एक ही टीम इंडिया परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी हर सफलता पूरे देश की साझा उपलब्धि है।
मुक्केबाजी शिविर में भी यही सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन अपने अनुशासन और समर्पण से युवा मुक्केबाजों जादुमणि सिंह, प्रीति और अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। अनुभवी खिलाड़ियों के साथ अभ्यास कर युवा मुक्केबाज केवल तकनीक ही नहीं सीख रहे, बल्कि बड़े मंच पर दबाव के बीच खेलने का आत्मविश्वास भी हासिल कर रहे हैं।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष डॉ. पी. टी. उषा ने मंगलवार को आईओए के हवाले से कहा कि बहु-खेल प्रतियोगिताओं की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी एक-दूसरे की सफलता का समान उत्साह से जश्न मनाते हैं।
उन्होंने कहा, “एक भारोत्तोलक तैराक की सफलता पर खुश होता है, मुक्केबाज एथलीट का उत्साह बढ़ाता है और लॉन बॉल्स खिलाड़ी किसी दूसरे खेल के खिलाड़ी को बधाई देता है। सभी अलग-अलग खेलों से हैं, लेकिन सभी एक ही जर्सी पहनकर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही भावना टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत है। अब तक जीते गए हर पदक का जश्न पूरे दल ने मनाया है और यही सामूहिक गर्व उन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाता है, जिन्हें अभी प्रतियोगिता में उतरना है।”
भारतीय दल का मानना है कि राष्ट्रमंडल खेलों की सबसे बड़ी ताकत यही सामूहिक भावना है, जहां व्यक्तिगत सपने पूरे दल की साझा उम्मीद बन जाते हैं। हर भारतीय पदक अगले खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बन रहा है और यही विश्वास टीम इंडिया को ग्लासगो में लगातार आगे बढ़ा रहा है।



