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रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वरदान बनी ‘पीएम स्वनिधि योजना’: 75 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को मिला ऋण, स्वरोज़गार को नई उड़ान

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि – PM SVANidhi) योजना ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक पूरे देश में 75 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को सफलतापूर्वक ऋण वितरित किया जा चुका है।

आर्थिक समावेशन (Financial Inclusion) और निचले तबके के सशक्तिकरण की दिशा में इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पीएम स्वनिधि योजना के तहत बिना किसी गारंटी (Collateral-free) के रेहड़ी-पटरी वालों को उनके व्यवसाय को फिर से शुरू करने या उसे बढ़ाने के लिए वर्किंग कैपिटल लोन (कार्यशील पूंजी ऋण) प्रदान किया जाता है। योजना के तहत शुरुआती ऋण 10,000 रुपये का होता है। इसे समय पर चुकाने वाले लाभार्थी 20,000 रुपये और फिर 50,000 रुपये तक के बड़े ऋण के लिए पात्र हो जाते हैं, जिससे उन्हें साहूकारों के चंगुल से मुक्ति मिली है।

मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि इस योजना ने डिजिटल लेन-देन को ज़मीनी स्तर पर बढ़ावा देने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। ऋण प्राप्त करने वाले अधिकांश स्ट्रीट वेंडर्स अब अपने ग्राहकों से डिजिटल पेमेंट (UPI) स्वीकार कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें सरकार की ओर से नकद प्रोत्साहन (कैशबैक) भी दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि असंगठित क्षेत्र के इन छोटे व्यापारियों का मुख्यधारा की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ना, भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि और गरीबी उन्मूलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है। 75 लाख के इस ऐतिहासिक आंकड़े ने साबित कर दिया है कि सही नीतियों से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी विकास की किरण पहुंचाई जा सकती है।

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