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NEET-UG विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक लगाने से फिर किया इनकार, एनटीए (NTA) से मांगा परीक्षा सुधार का ब्लूप्रिंट

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर चल रहे देशव्यापी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक बार फिर NEET-UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस सबूत के पूरी परीक्षा रद्द करने या काउंसलिंग रोकने से उन लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य और करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यह परीक्षा पास की है।

हालांकि, कोर्ट ने काउंसलिंग को हरी झंडी दे दी है, लेकिन पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स विवाद और परीक्षा केंद्रों पर हुई कथित अनियमितताओं को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी स्तर पर हुई धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने NTA और शिक्षा मंत्रालय से परीक्षा प्रणाली को फूलप्रूफ (दोषरहित) बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत समय-सीमा (Timeline) और ब्लूप्रिंट की मांग की है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में किसी विशेष केंद्र या राज्य में व्यापक स्तर पर पेपर लीक या धांधली की बात साबित होती है, तो अदालत अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। गौरतलब है कि प्रतियोगी छात्रों द्वारा परीक्षा में पारदर्शिता की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी दबाव और कोर्ट की सख्ती के बीच हाल ही में केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन भी किया है, जिसका मुख्य काम परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं के ढांचे में तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करना है। यह फैसला मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए फिलहाल एक बड़ी राहत लेकर आया है।

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