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‘डिजिटल इंडिया’ की बड़ी छलांग: यूपीआई (UPI) लेनदेन ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, कैशलेस इकॉनमी की दिशा में भारत का परचम

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: भारत डिजिटल पेमेंट की दुनिया में एक के बाद एक नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा हाल ही में जारी की गई ‘डिजिटल इंडिया’ प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन ने जुलाई 2026 में एक नया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह दर्शाता है कि शहरी केंद्रों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक नकद रहित (कैशलेस) अर्थव्यवस्था को तेजी से अपनाया जा रहा है।

रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित यूपीआई के माध्यम से होने वाले दैनिक लेनदेन की संख्या करोड़ों के पार पहुंच गई है। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके पेमेंट करना अब भारतीयों की दैनिक दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ते इंटरनेट डेटा और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में डिजिटल साक्षरता बढ़ने के कारण यूपीआई ने यह अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है।

इस सफलता का एक बड़ा श्रेय सरकार की डिजिटल इंडिया पहल और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की दूरदर्शी नीतियों को जाता है। यूपीआई की सफलता अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं है; फ्रांस, यूएई, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे कई देशों में भी अब भारतीय यूपीआई व्यवस्था को स्वीकार किया जाने लगा है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की तकनीकी साख मजबूत हुई है, बल्कि प्रवासी भारतीयों और पर्यटकों के लिए भी लेनदेन बेहद आसान हो गया है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने से अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है, टैक्स चोरी पर लगाम लगी है और सरकार को सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में सब्सिडी (DBT) पहुंचाने में भी बड़ी मदद मिली है।

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