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संसद के मॉनसून सत्र का चौथा दिन: विपक्ष के हंगामे को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का बयान- ‘संसद चले तो फांसी के प्रावधान वाला सख्त कानून लाएंगे’

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र का चौथा दिन भी पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष द्वारा लगातार दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित किए जाने के बाद सत्ता पक्ष ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुखर और वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर विपक्ष संसद चलने दे, तो सरकार पेपर लीक माफियाओं के लिए फांसी (Capital Punishment) के प्रावधान वाला एक अति-सख्त कानून लाने को तैयार है।

‘हंगामे से नहीं, चर्चा से निकलेगा समाधान’

संसद भवन परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “विपक्ष नहीं चाहता कि देश के युवाओं की समस्या का समाधान हो। वे केवल संसद को बंधक बनाकर टीवी कैमरों का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। हमारी सरकार ने पहले ही एक सख्त एंटी-पेपर लीक कानून लागू कर दिया है। लेकिन अगर विपक्ष वाकई गंभीर है, तो वे अपनी सीटों पर बैठें और बहस करें। हम शिक्षा माफियाओं के लिए फांसी की सजा का प्रावधान वाला बिल लाने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन इसके लिए संसद का चलना जरूरी है।”

विपक्ष की मंशा पर उठाए सवाल

दुबे ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों (INDIA Bloc) पर आरोप लगाया कि वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की भावनाओं का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “विपक्ष के शासन वाले राज्यों में भी अनगिनत पेपर लीक हुए हैं, तब ये लोग चुप क्यों थे? सरकार इस पूरे नेक्सस (Nexus) को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।”

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की ‘बयानबाजी’ करार दिया है, जबकि कानून के जानकारों का मानना है कि शिक्षा अपराधों के लिए फांसी की सजा का विचार अत्यधिक कठोर है, लेकिन यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कितना कड़ा संदेश देना चाहती है।

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