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भारत ने अफगानिस्‍तान के बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी राहत सामग्री

नई दिल्ली ( विवेक ओझा) : भारत अपनी विदेश नीति में मानवतावावादी सहायता और मानवतावादी हस्तक्षेप को बड़ी तरजीह देता है और अब भारत ने अपने से 106 किमी लंबी सीमा साझा करने वाले मुल्क अफगानिस्तान को एक बार फिर से मुश्किल घड़ी में मदद दी है। भारत ने अफगानिस्‍तान के नूरिस्तान में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भेजी है। खाद्य सामग्री और टेंट सहित अन्‍य राहत सामग्री अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी गयी है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्‍ट में कहा कि भारत इस कठिन समय में अफगानिस्‍तान के संकटग्रस्त लोगों के साथ है।

भारत की अफ़ग़ानिस्तान में विकासात्मक परियोजनाओं में भागीदारी –

भारत के अफ़ग़ानिस्तान में भू सामरिक और भू राजनीतिक हित हैं और मध्य एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में भारत के भू आर्थिक हित भी कहीं ना कहीं अफ़ग़ानिस्तान से संबद्ध हैं । भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के संबंध में निम्नांकित दृष्टिकोण और रणनीति के आधार पर विकासात्मक साझेदारी को बढ़ावा दिया है।

भारत ने एक स्थिर , शांतिपूर्ण और समृद्ध दक्षिण एशिया के लिए अफ़ग़ानिस्तान की भूमिका को केंद्रीय माना है। दूसरे शब्दों में भारत का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान की शांति और सुरक्षा का सीधे तौर पर प्रभाव दक्षिण एशिया पर पड़ता है । अफगानिस्तान को उसके महत्व के चलते हार्ट ऑफ एशिया के रूप में भी जाना जाता है ।

भारत अफ़ग़ानिस्तान में वहां के राष्ट्रीय प्रतिरक्षा बलों को सैन्य प्रशिक्षण के जरिए उनके क्षमता निर्माण पर बल देता है और वहां के प्रतिरक्षा तंत्र के अफगानी करण का समर्थन करता है ।

भारत मध्य एशिया में शांति और सुरक्षा के लिए भी अफ़ग़ानिस्तान में आंतरिक माहौल के ठीक रहने को जरूरी समझता है । अफ़ग़ानिस्तान से अफीम और नशीले पदार्थों की तस्करी , नार्को आतंकवाद , धार्मिक और इस्लामिक कट्टरता का प्रसार मध्य एशिया में हो सकता है । इसलिए भारत सहित सभी शंघाई सहयोग संगठन सदस्य देश चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशियाई देशों में बेहतर संबंध बने रहें ।

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