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राष्ट्रपति मुर्मु, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, सिन्हा ने अर्पित की कारगिल विजय दिवस पर वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि

नई दिल्ली : कारगिल विजय दिवस पर कृतज्ञ राष्ट्र आज वीर जवानों को नमन कर रहा है। इस वर्ष मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली की बजाय लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज सुबह अपनी एक्स पोस्ट पर भारतीय सशस्त्र बलों के बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दिवस की पूर्व संध्या पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय सेना के बहादुर जवानों को द्रास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स हैंडल पर मुर्मु ने आज सुबह लिखा,” कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धाओं को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उनका अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और अनन्य राष्ट्रभक्ति हमारी सेना की गौरवशाली परंपरा के अप्रतिम उदाहरण हैं। देश, सदैव उनका ऋणी रहेगा। हमारे उन पराक्रमी वीरों की शौर्यगाथा, आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा के पथ पर चलने के निरंतर प्रेरित करती रहेगी।”

 

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने लिखा, ” कारगिल विजय दिवस पर देश भारतीय सशस्त्र बलों के उन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है, जिनकी असाधारण हिम्मत, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान ने कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत दिलाई और हमारे देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखा। यह जीत भारत की सैन्य ताकत, राष्ट्रीय एकता और अपनी मातृभूमि के हर इंच की रक्षा करने के अटूट संकल्प का प्रमाण है। देश हमारे बहादुर सैनिकों और उनके परिवारों का हमेशा आभारी रहेगा। जय हिंद।”

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा, ” कारगिल विजय दिवस पर सारा देश भारत की सुरक्षा के लिए बहादुर सैनिकों के असाधारण साहस और समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करता है। बेहद मुश्किल हालात में भी उनका अदम्य साहस हमेशा राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। उनकी अटूट देशभक्ति और कर्तव्य-निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

 

केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने लिखा, ” कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य शौर्य और अद्भुत पराक्रम का प्रतीक है। वर्ष 1999 में हिमालय की दुर्गम बर्फीली चोटियों पर विषम परिस्थितियों और शत्रु के ऊंचाई पर स्थित मोर्चों के बावजूद हमारे वीर जवानों ने ऑपरेशन विजय के माध्यम से दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। कारगिल विजय दिवस पर उन सभी वीर सपूतों का स्मरण कर नमन करता हूं, जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर देश की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखा।”

 

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लिखा, ” मैं कारगिल विजय दिवस पर उन शहीदों को नमन करता हूं जिन्होंने ऑपरेशन विजय के दौरान मां भारती की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे सशस्त्र बलों का असाधारण साहस आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करेगा। मैं शहीद नायकों के परिवारों के प्रति भी गहरी श्रद्धा व्यक्त करता हूं। उनका निस्वार्थ समर्पण हमारे परम राष्ट्रीय गौरव का एक स्थायी प्रतीक है।”

 

महत्वपूर्ण है कि इस वर्ष कारगिल विजय दिवस का मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली की बजाय लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित किया गया है। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्रास पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह युद्ध मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक लगभग 60 दिन लड़ा गया।

 

ठंड के मौसम में की गई घुसपैठ का पता चलने के बाद भारतीय थल सेना ने ऑपरेशन विजय और भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया। भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ियों और माइनस तापमान जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए तोलोलिंग, टाइगर हिल और प्वाइंट 4875 जैसी महत्वपूर्ण चोटियों को पाकिस्तान के कब्जे से वापस छीना। भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम के बाद 26 जुलाई 1999 को राष्ट्र ने सभी खोई हुई चौकियों पर पुनः कब्जा कर लिया। इसी विजय की स्मृति में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

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