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ज्ञानवापी और भोजशाला मामला: सील किए गए क्षेत्रों और सर्वेक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकती है अहम सुनवाई, यूपी पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली / वाराणसी: देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील धार्मिक विवादों में शामिल वाराणसी के ‘ज्ञानवापी परिसर’ (Gyanvapi Complex) और मध्य प्रदेश के ‘भोजशाला’ मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर आज (24 जुलाई) उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने की पूरी संभावना है। शीर्ष अदालत की तीन जजों की पीठ ज्ञानवापी के सील किए गए वज़ूखाना (Vazukhana) क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Scientific Survey) और वहां स्थित कथित ‘शिवलिंग’ की सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें

हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि वज़ूखाना क्षेत्र की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा विस्तृत वैज्ञानिक जांच कराई जाए, ताकि वहां मौजूद संरचना की सही उम्र और ऐतिहासिकता का पता चल सके। वहीं, मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी) ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि 1991 के ‘पूजा स्थल अधिनियम’ (Places of Worship Act 1991) के तहत धार्मिक स्थलों के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, इसलिए सर्वेक्षण पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए।

वाराणसी और संवेदनशील जिलों में हाई-अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस सुनवाई के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राज्य भर में, विशेष रूप से वाराणसी, मथुरा, अयोध्या और प्रयागराज जैसे संवेदनशील धार्मिक शहरों में सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक कढ़ी कर दी है। वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर के आसपास त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा (Three-tier Security) तैनात किया गया है। सीआरपीएफ (CRPF) और यूपी पुलिस के जवान 24 घंटे सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए निगरानी कर रहे हैं।

शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील

प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक या सांप्रदायिक पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। साइबर सेल की टीमें फेसबुक, एक्स (X) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर लगातार नजर रख रही हैं। धर्मगुरुओं और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने भी आम जनता से अदालत के फैसले का सम्मान करने और प्रदेश में शांति व आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। कानून के जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का आज का रुख इस लंबे कानूनी विवाद की भावी दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।

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