हरित ऊर्जा और कौशल विकास: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पंचायत इंफ्रास्ट्रक्चर और माइक्रो कोल्ड स्टोरेज में स्वच्छ ऊर्जा के लिए नया फ्रेमवर्क लागू किया

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: ग्रामीण भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर (Self-Reliant) बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने गुरुवार को ‘हरित पंचायत और स्वच्छ ऊर्जा फ्रेमवर्क’ (Green Panchayat and Clean Energy Framework) का आधिकारिक शुभारंभ किया। इस योजना के तहत देश भर की ग्राम पंचायतों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से सौर ऊर्जा (Solar Energy) से लैस किया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है।
माइक्रो कोल्ड स्टोरेज से किसानों को लाभ
इस फ्रेमवर्क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गांवों में ‘माइक्रो कोल्ड स्टोरेज’ (Micro Cold Storages) की स्थापना है। अक्सर देखा गया है कि बिजली न होने या महंगी होने के कारण किसान अपनी ताजी सब्जियां, फल और दूध लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख पाते और उन्हें औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। अब सरकार पंचायतों में छोटे, सौर ऊर्जा चालित कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर रही है। इससे किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में अच्छे दाम मिलने पर ही उन्हें बेचेंगे।
पंचायत भवनों का सौर-करण (Solarisation)
योजना के तहत देश भर के पंचायत भवनों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और ग्रामीण स्कूलों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे न केवल गांवों को निर्बाध बिजली (Uninterrupted Power Supply) मिलेगी, बल्कि पंचायतों का बिजली का भारी-भरकम बिल भी बचेगा, जिसका उपयोग वे गांव के अन्य विकास कार्यों में कर सकेंगी।
स्थानीय युवाओं का कौशल विकास (Skill Development)
इस योजना का एक और बड़ा फायदा ग्रामीण रोजगार को मिलेगा। सोलर पैनल्स और कोल्ड स्टोरेज के रखरखाव के लिए हर गांव में स्थानीय युवाओं को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण (Skill Training) दिया जाएगा। ‘सूर्यमित्र’ (Suryamitra) योजना के तहत प्रशिक्षित ये युवा गांवों में ही ‘ग्रीन जॉब्स’ (Green Jobs) प्राप्त कर सकेंगे। इंडियन व्यू टीम के अनुसार, यह फ्रेमवर्क न केवल भारत के कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) को कम करेगा, बल्कि गांवों को आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत बनाएगा।



