भारत का ‘ग्लोबल एआई हब’ बनने का संकल्प: डिजिटल क्षमता और एआई (AI) विकास के लिए सरकार का मेगा प्लान

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: 21वीं सदी की तकनीकी दौड़ में भारत अब पीछे रहने वाला नहीं है। केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के क्षेत्र में भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहराया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत केवल एआई का ‘उपभोक्ता’ (Consumer) नहीं रहेगा, बल्कि एआई तकनीक, रिसर्च और विकास का दुनिया का सबसे बड़ा ‘निर्माता’ (Creator) और ‘ग्लोबल एआई हब’ बनेगा। इसके लिए सरकार एक विस्तृत और बहुआयामी मेगा प्लान पर काम कर रही है।
‘इंडिया एआई मिशन’ (India AI Mission) को मिलेगी रफ्तार
सरकार ने हाल ही में ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को मंजूरी दी है। इस फंड का उपयोग एआई इकोसिस्टम (AI Ecosystem) के हर पहलू को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। सरकार की योजना के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:
1. ‘सॉवरेन एआई कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ (Sovereign AI Compute Infrastructure):
एआई के विकास के लिए सबसे जरूरी चीज ‘सुपरकंप्यूटिंग पावर’ है। भारत सरकार देश भर में 10,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) का एक विशाल नेटवर्क स्थापित कर रही है। यह नेटवर्क देश के स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपने एआई मॉडल प्रशिक्षित (Train) कर सकें।
2. बहुभाषी एआई (Multilingual AI – Bhashini):
भारत की भाषाई विविधता को देखते हुए, सरकार का जोर ऐसे एआई मॉडल्स विकसित करने पर है जो सभी भारतीय भाषाओं को समझें और बोलें। ‘भाषिणी’ कार्यक्रम के तहत ऐसे लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) बनाए जा रहे हैं, जिससे गांव का एक आम नागरिक भी अपनी स्थानीय भाषा में तकनीक और सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सके।
3. डेटा प्लेटफॉर्म और प्राइवेसी:
एआई को सीखने के लिए डेटा की जरूरत होती है। सरकार एक गैर-व्यक्तिगत (Non-personal) डेटा संग्रह प्लेटफॉर्म बना रही है, जो शोधकर्ताओं को सुरक्षित तरीके से उच्च गुणवत्ता वाला भारतीय डेटासेट उपलब्ध कराएगा। साथ ही, डिजिटल इंडिया बिल के जरिए डेटा प्राइवेसी को भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
4. एआई शिक्षा और रोजगार:
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए स्कूल और यूनिवर्सिटी स्तर पर एआई पाठ्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में एआई इनोवेशन सेंटर खोले जाएंगे ताकि ग्रामीण युवाओं को भी इस क्रांति का हिस्सा बनाया जा सके।
सरकार का यह विजन स्पष्ट है कि एआई का विकास ‘समावेशी’ (Inclusive) होना चाहिए—यानी “एआई फॉर ऑल” (AI for All)। स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग कर भारत न केवल अपनी घरेलू समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए तकनीकी विकास का एक नया मॉडल भी पेश करेगा।



