कृषि यंत्रीकरण से बदल रही भारत के गांवों की तस्वीर: सरकार ने बांटी 22 लाख मशीनें, ड्रोन-खेती का हुआ विस्तार

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की धुरी कृषि है। भारतीय कृषि को पारंपरिक तरीकों से निकालकर आधुनिकता और तकनीक से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। ‘सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन’ (SMAM) योजना के तहत सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश भर के किसानों को 22 लाख से अधिक आधुनिक कृषि मशीनें वितरित की हैं। इसके साथ ही, खेती में ड्रोन (Kisan Drones) के उपयोग को एक राष्ट्रव्यापी अभियान का रूप दे दिया गया है।
कृषि यंत्रीकरण (Agricultural Mechanization) की आवश्यकता क्यों?
बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, और कृषि मजदूरों की कमी के कारण आज के समय में केवल बैलों और पारंपरिक तरीकों से खेती करना लाभप्रद नहीं रह गया है। कृषि यंत्रीकरण का मुख्य उद्देश्य:
- * बीजों की बुवाई से लेकर फसल कटाई तक के समय को कम करना है।
- * उर्वरकों और पानी का सटीक उपयोग सुनिश्चित करना है।
- * फसल की बर्बादी को रोकना और किसानों की आय को दोगुना करना है।
‘सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन’ का प्रभाव:
इस योजना के तहत, छोटे और सीमांत किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर और थ्रेशर जैसी भारी और महंगी मशीनें खरीदने के लिए 40% से 80% तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है। जो किसान इन मशीनों को खरीद नहीं सकते, उनके लिए सरकार ने ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (CHC) स्थापित किए हैं, जहां से किसान मामूली किराए पर मशीनें ले सकते हैं। अब तक 22 लाख मशीनें सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाई जा चुकी हैं, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आई है।
‘किसान ड्रोन’ बने खेती का नया हथियार
यंत्रीकरण के इस चरण में सबसे बड़ी क्रांति ‘किसान ड्रोन’ (Kisan Drones) के रूप में सामने आई है। सरकार ने ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को भारी वित्तीय सहायता प्रदान की है।
ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से:
- * कीटनाशकों और तरल उर्वरकों (जैसे नैनो यूरिया) के समान और सटीक छिड़काव के लिए किया जा रहा है।
- * इससे न केवल किसानों के स्वास्थ्य की रक्षा हो रही है (कीटनाशकों के सीधे संपर्क में न आने से), बल्कि समय की भारी बचत भी हो रही है। एक एकड़ खेत में छिड़काव जो पहले घंटों में होता था, अब ड्रोन से कुछ मिनटों में हो जाता है।
- * फसल के स्वास्थ्य की निगरानी और पैदावार का सटीक अनुमान लगाने में भी एआई (AI) सक्षम ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है।
भारत सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि देश की कृषि का भविष्य अब केवल मानसून पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह तकनीक, यंत्रीकरण और इनोवेशन के मजबूत कंधों पर खड़ा हो रहा है।



