5G के बाद अब ‘सुपरफास्ट’ 6G की बारी: रिलायंस जियो का रोडमैप तैयार, 2027 की शुरुआत में होगा स्वदेशी तकनीक का कमर्शियल रोलआउट

विवेक ओझा/ मुंबई: भारतीय दूरसंचार (टेलीकॉम) क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा तकनीकी धमाका होने जा रहा है। देश में 4G और 5G की सफल क्रांति लाने के बाद, रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने अब भारत को सीधे भविष्य की तकनीक से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली है। जियो ने आज आधिकारिक तौर पर अपने स्वदेशी 6G (Sixth Generation) नेटवर्क का पूरा रोडमैप दुनिया के सामने रख दिया है।
कंपनी ने घोषणा की है कि उसने भारत के प्रमुख महानगरों में अपनी पूर्णतः स्वदेशी 6G तकनीक का ‘क्लोज्ड-लूप’ परीक्षण (Closed-loop Testing) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद, जियो वर्ष 2027 के शुरुआती महीनों में चुनिंदा सेक्टर्स और एंटरप्राइज ग्रैड्स के लिए इसका पहला कमर्शियल रोलआउट (Commercial Rollout) शुरू करने जा रही है।
सफल ‘क्लोज्ड-लूप’ परीक्षण: क्या हैं इसके मायने?
रिलायंस जियो के तकनीकी विंग के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह से इन-हाउस (In-house) यानी भारत में विकसित प्रयोगशालाओं में किया गया है। ‘क्लोज्ड-लूप’ परीक्षण का सफल होने का सीधा मतलब यह है कि 6G के कोर नेटवर्क, सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम, और हार्डवेयर सिग्नलों के बीच का तालमेल बिना किसी बाहरी रुकावट या डेटा लॉस के बिल्कुल सटीक रहा है।
इस परीक्षण के दौरान जो बातें सबसे खास रहीं, वे निम्नलिखित हैं:
* अल्ट्रा-लो लेटेंसी (Ultra-low Latency): 6G नेटवर्क में लेटेंसी (डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय) को लगभग शून्य (माइक्रोसेकंड्स में) पर ला दिया गया है।
* 100 गुना ज्यादा स्पीड: माना जा रहा है कि जियो का 6G नेटवर्क मौजूदा 5G के मुकाबले लगभग 100 गुना तेज गति से डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम होगा, जिससे इंटरनेट की परिभाषा पूरी तरह बदल जाएगी।
* पूरी तरह मेड इन इंडिया: इस तकनीक के लिए जियो ने किसी भी विदेशी वेंडर पर निर्भरता नहीं रखी है, जिससे देश का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
2027 का रोलआउट: कौन से ‘चुनिंदा सेक्टर्स’ होंगे पहले अपग्रेड?
जियो ने साफ किया है कि वर्ष 2027 की शुरुआत में होने वाला पहला कमर्शियल रोलआउट सीधे आम मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए न होकर, देश के उन रणनीतिक और औद्योगिक सेक्टर्स के लिए होगा जहां ‘रीयल-टाइम हाई-स्पीड डेटा’ की सबसे ज्यादा जरूरत है।
शुरुआती चरण में इन सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जाएगी:
- स्मार्ट हेल्थकेयर (Smart Healthcare): 6G की मदद से सुदूर ग्रामीण इलाकों में बैठे मरीजों की एआई-रोबोटिक्स के जरिए ‘रिमोट सर्जरी’ (Remote Surgery) करना मुमकिन हो सकेगा, जिसमें एक मिलीसेकंड की भी देरी जानलेवा हो सकती है।
- एडवांस्ड ऑटोमेशन और एआई फैक्ट्रियां: देश के बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों में बिना इंसानों के चलने वाली एआई-संचालित फैक्ट्रियों और स्वायत्त वाहनों (Autonomous Vehicles) को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
- होलोग्राफिक कम्युनिकेशन (Holographic Calls): कॉर्पोरेट सेक्टर्स के लिए वीडियो कॉलिंग के बजाय 3D होलोग्राम कॉलिंग की सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे लोग वर्चुअली एक-दूसरे के सामने मौजूद महसूस होंगे।
मस्क और वैश्विक दिग्गजों को टक्कर
> टेलीकॉम और ग्लोबल टेक पॉलिसी के नज़रिए से देखा जाए, तो रिलायंस जियो का यह कदम भारत को वैश्विक मंच पर ‘लीडर’ की कतार में खड़ा करता है। 2G, 3G और 4G के दौर में भारत हमेशा विदेशी तकनीकों (जैसे यूरोपीय या अमेरिकी मानकों) के आयात और उनके रोलआउट का इंतजार करता था। लेकिन 5G के बाद अब 6G के मामले में भारत दुनिया के विकसित देशों (जैसे दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है।
> एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ जैसी विदेशी सैटेलाइट कंपनियां जब भारत में पैर पसारने के लिए आवेदन कर रही हैं (जैसा कि हाल ही में दूरसंचार विभाग में देखा गया), ऐसे समय में जियो का स्वदेशी 6G रोडमैप यह साबित करता है कि भारतीय कंपनियां घरेलू बाजार पर अपना दबदबा छोड़ने के मूड में नहीं हैं। चुनौती बस इतनी होगी कि इस अत्याधुनिक तकनीक के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे बड़े पैमाने पर फाइबर बिछाना और नए एआई डेटा सेंटर्स बनाना) को 2027 से पहले कितनी तेजी से तैयार किया जाता है।
फिलहाल, जियो की इस घोषणा ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले कुछ ही सालों में डिजिटल इंडिया का पूरा स्वरूप बदलने वाला है और भारत ‘सिक्स-जी’ की इस आसमानी रेस में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।



