लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर में भीषण अग्निकांड, 15 छात्रों की मौत; सीएम योगी ने बीच में छोड़ा अलीगढ़ दौरा, दिए उच्च स्तरीय जांच के सख्त आदेश

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) इलाके में सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में भीषण आग लगने से एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। इस इमारत में चल रहे एक ‘एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर’ में आग और धुएं की चपेट में आने से 15 लोगों (मुख्यतः युवा छात्रों) की दम घुटने से मौत हो गई है, जबकि आधा दर्जन से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम बीच में ही रद्द कर दिया और सीधे ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाल लिया।
सीएम योगी का कड़ा संज्ञान और त्वरित एक्शन
इस हृदयविदारक घटना की सूचना मिलते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कड़ा संज्ञान लिया। जिस समय यह हादसा हुआ, मुख्यमंत्री अलीगढ़ के दौरे पर थे और एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। हादसे की गंभीरता और छात्रों की मौत की खबर सुनते ही सीएम योगी ने अपना भाषण और अलीगढ़ दौरा तुरंत बीच में ही रोक दिया और तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
लखनऊ पहुंचते ही मुख्यमंत्री का काफिला सीधे अलीगंज के उषा मेहता मार्ग स्थित घटनास्थल पर पहुंचा। वहां उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP), एनडीआरएफ (NDRF) और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी ली।
घटनास्थल का मुआयना करने के तुरंत बाद सीएम योगी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां उन्होंने घायल छात्रों और उनके रोते-बिलखते परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में कोई भी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
मुआवजे का ऐलान और उच्च-स्तरीय जांच के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की ओर से मृतकों के आश्रितों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता (Ex-gratia) देने की घोषणा की है। (ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी PMNRF से मृतकों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की मदद का ऐलान किया है।)
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए इस पूरे अग्निकांड की एक उच्च-स्तरीय जांच (High-Level Probe) के सख्त आदेश दिए हैं। सीएम ने कहा है कि:
* इस बात की गहन जांच की जाए कि बिना ‘फायर एनओसी’ (Fire NOC) और सुरक्षा मानकों के यह कमर्शियल बिल्डिंग और कोचिंग सेंटर कैसे चल रहा था।
* हादसे के लिए जिम्मेदार इमारत के मालिक और लापरवाही बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की तुरंत जवाबदेही तय की जाए।
* मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कैसे हुआ हादसा और खौफनाक था मंजर
जानकारी के अनुसार, जिस तीन मंजिला इमारत में यह आग लगी, उसके ग्राउंड फ्लोर पर एक पेट शॉप (Pet Shop) और गेमिंग ज़ोन था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर एनिमेशन का कोचिंग सेंटर चल रहा था। दोपहर करीब 3 बजे इमारत के निचले हिस्से में अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते गाढ़े काले धुएं ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
* कूदकर बचाई जान: धुएं का गुबार इतना घना था कि छात्रों को सीढ़ियों से नीचे उतरने का रास्ता नहीं मिला। जान बचाने की जद्दोजहद में कई छात्रों ने पहली और दूसरी मंजिल की खिड़कियों से नीचे छलांग लगा दी, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी और पैरों में गंभीर चोटें आईं।
* दम घुटने (Suffocation) से मौतें: केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेमराज सिंह के अनुसार, अस्पताल में लाए गए 15 छात्रों की मौत मुख्य रूप से आग में झुलसने से ज्यादा दम घुटने (Asphyxiation) के कारण हुई है।
* दीवारें तोड़कर रेस्क्यू: 14 दमकल गाड़ियों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म के साथ पहुंची एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ की टीमों को बचाव के लिए बगल की इमारत की छत से दीवार तोड़कर अंदर घुसना पड़ा।
यह दर्दनाक हादसा शहरी इलाकों में बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे कोचिंग सेंटरों की व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाता है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीएम योगी की इस सख्ती के बाद व्यवस्था में क्या बड़े बदलाव किए जाते हैं।



