MSME मंत्रालय ने आगरा में पहले ब्रिक्स MSME मंच और तीसरे MSME कार्य समूह की बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन किया

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह): भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने हाल ही में आगरा, उत्तर प्रदेश में ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ की व्यापक विषयवस्तु के अंतर्गत पहले ब्रिक्स एमएसएमई मंच और तीसरी एसएमई कार्य समूह की बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, बेलारूस, क्यूबा, मलेशिया, युगांडा और भारत सहित ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के नीति निर्माता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योगपति, उद्यमी और हितधारक एक साथ आए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभिन्न क्षेत्रों में एमएसएमई की विविधता और उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ। तीसरे एसएमई कार्य समूह की बैठक में ‘एमएसएमई इकोसिस्टम का निर्माण – संपोषित आधार से वैश्विक मार्ग तक’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें सदस्य देशों ने एमएसएमई इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अपने अनुभव और नीतिगत उपाय साझा किए।
दिन की शुरुआत दो समानांतर सत्रों के साथ हुई, पहला ब्रिक्स सदस्य देशों के निजी क्षेत्र के हितधारकों की ओर से विचार-विमर्श था और दूसरा तीसरे एसएमई कार्य समूह की बैठक थी। इन सत्रों ने ब्रिक्स देशों की सहयोग को गहरा करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और एक मजबूत, अधिक संपोषित और भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई इकोसिस्टम के निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। ब्रिक्स एमएसएमई मंच का उद्घाटन सत्र ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और एक लचीले, नवोन्मेषी और भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
आगरा में आयोजित पहले ब्रिक्स एमएसएमई मंच में अपने मुख्य भाषण में, भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री भरत खेड़ा ने ब्रिक्स देशों में आर्थिक मजबूती, नवाचार और समावेशी विकास को प्रोत्साहन देने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने वित्त तक पहुंच, प्रौद्योगिकी अपनाने, डिजिटलीकरण, स्थिरता और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चर्चा से आगे बढ़कर ठोस सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने लघु व्यवसायों के सशक्तिकरण के लिए भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को एक परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया और एक मजबूत, अधिक नवोन्मेषी, संपोषित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एमएसएमई इकोसिस्टम के निर्माण के लिए ब्रिक्स देशों के बीच गहन सहयोग का आह्वान किया।



