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‘रोजगार अधिकार मार्च’ का शंखनाद: राहुल गांधी ने झारखंड से देशव्यापी अभियान को दिखाई हरी झंडी, केंद्र की नीतियों पर साधा तीखा निशाना

अभिषेक सिंह/ रांची | कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज झारखंड की धरती से केंद्र सरकार के खिलाफ एक नए और बड़े राजनीतिक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस द्वारा आयोजित रोजगार मेले की सफलता से उत्साहित पार्टी ने अब इस मुद्दे को सीधे सड़क पर उतारने का फैसला किया है। राहुल गांधी ने आज झारखंड से कांग्रेस के देशव्यापी ‘रोजगार अधिकार मार्च’ (Rojgar Adhikar March) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिला स्तर पर शुरू किए गए इस मार्च के जरिए कांग्रेस देश के युवाओं को एकजुट करने और केंद्र सरकार की आर्थिक व रोजगार नीतियों को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

झारखंड से शुरुआत के राजनीतिक मायने

इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के पहले चरण के लिए झारखंड को चुनना कांग्रेस का एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट और यहाँ के आदिवासी व पिछड़े युवाओं में रोजगार को लेकर बढ़ती आकांक्षाओं को देखते हुए इस मार्च की शुरुआत यहीं से की गई।

उद्घाटन रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसरों के अभाव में पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियां स्थानीय युवाओं को उनका हक देने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।

केंद्र की रोजगार नीतियों पर राहुल का चौतरफा हमला

झारखंड के जिला-स्तरीय मार्च को हरी झंडी दिखाने के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के दावों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने अपने भाषण में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों को उठाया:

* पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी: हाल ही में नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। पेपर लीक और सॉल्वर गैंग ने देश के करोड़ों मेधावी छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है।
* अग्निवीर योजना पर कड़ा रुख: उन्होंने सेना में अल्पकालिक भर्ती वाली ‘अग्निवीर योजना’ को देश के युवाओं के साथ एक क्रूर मजाक बताया। राहुल ने दावा किया कि यह योजना युवाओं को न तो दीर्घकालिक सुरक्षा देती है और न ही देश की रक्षा प्रणाली के हित में है।
* खाली पदों और निजीकरण का विरोध: नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, रेलवे और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में लाखों स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार युवाओं को पक्की नौकरी देने के बजाय इन क्षेत्रों का तेजी से निजीकरण कर रही है।

क्या है ‘रोजगार अधिकार मार्च’ का मुख्य एजेंडा?

कांग्रेस का यह ‘रोजगार अधिकार मार्च’ देश के हर राज्य के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। इसके तहत युवा कांग्रेस (IYC) और पार्टी के स्थानीय नेता जिला स्तर पर निम्नलिखित एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे:

1. ‘राइट टू एम्प्लॉयमेंट’ कानून की मांग: कांग्रेस युवाओं के बीच यह संदेश ले जा रही है कि शिक्षा की तरह ‘रोजगार’ को भी नागरिकों का एक मौलिक कानूनी अधिकार (Right to Work) बनाया जाना चाहिए।
2. जिलाधिकारियों को ज्ञापन: हर जिले में मार्च निकालने के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों (DMs) के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें खाली पड़े पदों को तुरंत भरने की समयबद्ध समय-सारणी की मांग की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषण: युवाओं को लामबंद करने का दांव

> एक राजनीतिक विश्लेषक के नज़रिए से देखा जाए तो राहुल गांधी का ‘रोजगार अधिकार मार्च’ 2026 के इस चुनावी वर्ष में विपक्ष की एक सोची-समझी और धारदार रणनीति है। बेरोजगारी एक ऐसा मुद्दा है जो जाति और धर्म की सीमाओं से परे जाकर सीधे देश के सबसे बड़े वोट बैंक यानी ‘युवाओं’ को प्रभावित करता है।
> हालिया आम चुनावों में विपक्ष को मिले युवाओं के समर्थन को कांग्रेस इस मार्च के जरिए और मजबूत करना चाहती है। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले देश के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों से इस आंदोलन की शुरुआत करके राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर करने के लिए आर्थिक मोर्चे और युवाओं के मुद्दों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएंगे।

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