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नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) एनएसए बैठक संपन्न: साइबर आतंकवाद और ‘डीपफेक’ के खिलाफ बनेगा वैश्विक चक्रव्यूह, सदस्य देशों में बनी ऐतिहासिक सहमति

विवेक ओझा/ नई दिल्ली : भारत की मेजबानी में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) की उच्च स्तरीय बैठक आज एक बड़े और ऐतिहासिक साझा संकल्प के साथ संपन्न हो गई। इस दो दिवसीय महामंथन में भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और हाल ही में शामिल हुए नए सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुखों ने हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य फोकस पारंपरिक थल या वायु सेना के युद्धों के बजाय समकालीन समय के सबसे बड़े अदृश्य खतरों पर रहा। सभी सदस्य देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को अस्थिर करने वाले ‘साइबर आतंकवाद’ (Cyber Terrorism) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग से पैदा हुए ‘डीपफेक’ (Deepfake) के खिलाफ एक मजबूत और साझा वैश्विक कार्ययोजना (Global Action Plan) पर आम सहमति जताई है।

साइबर आतंकवाद और डीपफेक: राष्ट्रीय सुरक्षा के नए मोर्चे

भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी देशों ने एक सुर में स्वीकार किया कि डिजिटल युग में अब युद्ध के मैदान पूरी तरह बदल चुके हैं। आज के समय में किसी देश के सामाजिक ताने-बाने और अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने के लिए सीमाओं पर मिसाइलें दागने की जरूरत नहीं है; कंप्यूटर कोडिंग, रैनसमवेयर हमले और फर्जी डिजिटल सामग्री ही इसके लिए काफी हैं।

बैठक में विशेष रूप से ‘डीपफेक’ तकनीक के बढ़ते खतरों पर चिंता जताई गई। एआई (AI) द्वारा तैयार किए जा रहे फर्जी वीडियो और वॉयस क्लोनिंग न केवल आम नागरिकों को ठगने का जरिया बन रहे हैं, बल्कि इनके जरिए लोकतांत्रिक देशों में चुनावों को प्रभावित करने, राष्ट्रीय नेताओं की छवि धूमिल करने और भू-राजनीतिक तनाव व सांप्रदायिक दंगे भड़काने की खतरनाक साजिशें रची जा रही हैं। ब्रिक्स देशों ने इसे ‘डिजिटल हाइब्रिड वॉरफेयर’ (Digital Hybrid Warfare) की श्रेणी में रखते हुए इससे मिलकर निपटने का फैसला किया है।

साझा वैश्विक कार्ययोजना के मुख्य स्तंभ

नई दिल्ली में बनी इस नई और आक्रामक सुरक्षा रणनीति के तहत ब्रिक्स देशों ने एक बहुस्तरीय ब्लूप्रिंट पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

* रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग: साइबर हमलों, मालवेयर और डार्क वेब की संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी को सदस्य देश आपस में तुरंत (Real-time) साझा करेंगे, ताकि किसी भी बड़े डिजिटल हमले के प्रभाव को समय रहते निष्प्रभावी किया जा सके।
* एंटी-डीपफेक एआई टूल्स का विकास: ब्रिक्स के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर सामूहिक रूप से ऐसे अत्याधुनिक एआई-आधारित डिटेक्शन सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम विकसित करेंगे, जो सोशल मीडिया पर तैर रहे किसी भी डीपफेक कंटेंट की तुरंत पहचान कर उसे ब्लॉक कर सकें।
* टेक कंपनियों की जवाबदेही: बैठक में वैश्विक टेक दिग्गजों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसने पर सहमति बनी। इन कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से आतंकवादी प्रोपेगैंडा, फेक न्यूज और डीपफेक वीडियो को हटाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया जाएगा।
* डार्क वेब और क्रिप्टो पर प्रहार: डार्क वेब के जरिए होने वाली हथियारों व ड्रग्स की तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से की जा रही टेरर फंडिंग को रोकने के लिए एक विशेष ‘ब्रिक्स साइबर टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा।

कूटनीतिक संतुलन और ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व

सुरक्षा कूटनीति के नज़रिए से नई दिल्ली में हुई यह ब्रिक्स बैठक केवल तकनीकी चर्चा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके गहरे कूटनीतिक मायने भी रहे। इस बैठक के इतर भारत और चीन के प्रतिनिधियों के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी गतिरोध को कम करने की दिशा में सकारात्मक जमीन तैयार की है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूस की सुरक्षा चिंताओं को भी इस मंच पर गंभीरता से सुना गया।

ब्रिक्स एनएसए की यह सफल बैठक यह साबित करती है कि यह संगठन अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है, बल्कि 21वीं सदी की आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का एक बेहद शक्तिशाली और एकजुट धड़ा बनकर उभरा है। ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ के तहत साइबर सुरक्षा और एआई रेगुलेशन के खिलाफ जो साझा ढांचा तैयार किया गया है, वह आने वाले समय में वैश्विक डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित होगा। भारत ने इस बैठक की सफल अगुवाई कर एक बार फिर कूटनीतिक जगत में अपनी वैश्विक नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है।

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