दक्षिण की राजनीति में बड़ा उलटफेर?
दिल्ली में अमित शाह से मिले के. अन्नामलाई, बीजेपी छोड़ नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने की अटकलें तेज

देश के सियासी गलियारों में इस समय दक्षिण भारत की राजनीति को लेकर हलचल बेहद तेज हो गई है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई (K. Annamalai) ने देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुलाकात की है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद से ही तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक कयासों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अब जोरों पर है कि अन्नामलाई जल्द ही भाजपा को अलविदा कह सकते हैं और राज्य में अपनी एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर सकते हैं। इस संभावित कदम का सीधा और बड़ा असर तमिलनाडु सहित पूरे दक्षिण भारत की राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने जब से तमिलनाडु में भाजपा की कमान संभाली थी, उन्होंने राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति (Dravidian Politics) के बीच अपने आक्रामक अंदाज से पार्टी को एक नई दिशा और पहचान दी थी। उनकी ‘एन मन, एन मक्कल’ (मेरा देश, मेरे लोग) पदयात्रा ने राज्य में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और युवाओं को पार्टी से जोड़ा था। हालांकि, पिछले कुछ समय से संगठन के भीतर चल रहे बदलावों और राज्य इकाई के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। दिल्ली की इस बैठक को इसी पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई तमिलनाडु की जमीनी राजनीति में किसी के अधीन रहने के बजाय एक स्वतंत्र, मजबूत और विशुद्ध तमिल चेहरे के रूप में उभरने की इच्छा रखते हैं। अमित शाह के साथ हुई इस क्लोज-डोर बैठक को या तो उनके इसी असंतोष को दूर करने की आखिरी कोशिश माना जा रहा है, या फिर इसे एक सम्मानजनक विदाई की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अन्नामलाई पार्टी छोड़कर अपनी अलग राह चुनते हैं, तो यह तमिलनाडु में पैर पसारने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा सांगठनिक झटका साबित हो सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। ऐसे में यदि के. अन्नामलाई अपनी नई क्षेत्रीय पार्टी लॉन्च करते हैं, तो वे राज्य के युवा वर्ग और मौजूदा द्रविड़ दलों की कार्यशैली से नाराज चल रहे एक बड़े वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। जानकारों का कहना है कि अन्नामलाई की नई पार्टी सीधे तौर पर विपक्ष और क्षेत्रीय दलों के पारंपरिक वोटों में सेंध लगाएगी, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों के नतीजों पर दिखेगा। फिलहाल, इस महत्वपूर्ण मुलाकात पर न तो अमित शाह की ओर से और न ही अन्नामलाई की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है, जिसने इस राजनीतिक सस्पेंस को और ज्यादा गहरा कर दिया है।



