कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन का दिन
आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे 'संकटमोचक' डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र समेत 13 नए चेहरों को भी मिलेगी कैबिनेट में जगह

कर्नाटक की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित बदलाव होने जा रहा है। लंबे समय से चल रही सत्ता हस्तांतरण (Power Sharing) की अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए, कांग्रेस के कद्दावर नेता और पार्टी के ‘संकटमोचक’ कहे जाने वाले डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) आज कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह बदलाव राज्य में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और भविष्य की रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
सत्ता हस्तांतरण का फॉर्मूला हुआ लागू
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच रस्साकशी जगजाहिर थी। उस समय कांग्रेस आलाकमान ने बीच का रास्ता निकालते हुए ढाई-ढाई साल के सत्ता हस्तांतरण का अलिखित फॉर्मूला तय किया था। अब जब सिद्धारमैया का कार्यकाल पूरा हो गया है, तो पार्टी ने वादे के मुताबिक कमान डीके शिवकुमार को सौंपने का फैसला किया है। शिवकुमार, जिन्होंने राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाई थी, उनके समर्थकों में इस फैसले से भारी उत्साह है।
कैबिनेट में संतुलन और यतींद्र सिद्धारमैया की एंट्री
इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे खास बात केवल मुख्यमंत्री का बदलना नहीं है, बल्कि कैबिनेट का नया स्वरूप भी है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया आज मंत्री पद की शपथ लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यतींद्र को कैबिनेट में शामिल करना सिद्धारमैया गुट को शांत रखने और सत्ता संतुलन बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति है। यतींद्र के अलावा 13 अन्य विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले रहे हैं।
इस नई कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। वोक्कालिगा, लिंगायत, कुरुबा, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने 2028 के विधानसभा और आगामी पंचायत चुनावों के लिए एक मजबूत सामाजिक गठबंधन तैयार करने की कोशिश की है।
डीके शिवकुमार के सामने क्या हैं चुनौतियां?
एक कुशल प्रशासक और रणनीतिकार होने के बावजूद, नए मुख्यमंत्री की राह आसान नहीं होगी। शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य की माली हालत को संभालते हुए कांग्रेस की ‘पांच गारंटियों’ (Five Guarantees) को सुचारू रूप से लागू रखना होगा। इसके अलावा, भाजपा और जेडीएस (BJP-JDS) के मजबूत विपक्षी गठबंधन का सामना करना और पार्टी के भीतर गुटबाजी को रोककर एकजुटता बनाए रखना भी उनके लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
शपथ ग्रहण समारोह की भव्य तैयारियां
राजधानी बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं। इस समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे शहर को बैनरों और पोस्टरों से पाट दिया गया है। आज का दिन कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया है।



