पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित
केंद्र सरकार से E20 एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के अनिवार्य रोलआउट को तुरंत स्थगित करने की मांग
विवेक ओझा/ चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान आज राज्य की कृषि, पर्यावरण और ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस प्रस्ताव के माध्यम से पंजाब सरकार और विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार से मांग की है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20 Fuel Mandate) की अनिवार्य नीति को फिलहाल तुरंत प्रभाव से स्थगित किया जाए। विधानसभा ने केंद्र से आग्रह किया है कि जब तक देश के वाहन एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए पूरी तरह से तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं हो जाते, तब तक इस नीति को स्वैच्छिक रखा जाए।
सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने तर्क दिया कि E20 ईंधन के अचानक और अनिवार्य रोलआउट से आम वाहन मालिकों, विशेषकर मध्य वर्ग और किसानों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए सदन में बताया गया कि वर्ष 2023 से पहले बने पुराने वाहनों के इंजन (Non-E20 Compliant Engines) 20 प्रतिशत एथेनॉल वाले ईंधन को सहन करने में असमर्थ हैं। इससे इंजनों के रबर और धातु के पुर्जे तेजी से खराब हो रहे हैं, माइलेज में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आ रही है, और वाहनों के रखरखाव का खर्च काफी बढ़ गया है।
प्रस्ताव में E20 ईंधन नीति के कारण खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों पर पड़ने वाले दूरगामी दुष्प्रभावों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। पंजाब के कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एथेनॉल उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर मक्का और धान (चावल) जैसी फसलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अत्यधिक पानी की खपत वाली इन फसलों के व्यावसायिक उत्पादन से पंजाब में भूजल स्तर (Water Table) बेहद खतरनाक स्तर तक गिर रहा है। इसके अतिरिक्त, खाद्यान्न को ईंधन उत्पादन में डायवर्ट करने से भविष्य में खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने और खाद्य सुरक्षा के लिए संकट पैदा होने की पूरी आशंका है।
दिलचस्प बात यह रही कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सत्ताधारी दल और विपक्ष (कांग्रेस, अकाली दल व भाजपा के सदस्य) एक सुर में नजर आए। सभी विधायकों ने माना कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बिना पूर्व तैयारी के आम जनता पर ऐसी नीति थपना अनुचित है। विपक्षी सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को E20 ईंधन की बिक्री पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) घटाकर इसे सामान्य पेट्रोल से कम से कम 15 से 20 रुपये सस्ता करना चाहिए ताकि लोग स्वेच्छा से इसे अपनाएं।
विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव की प्रति तुरंत केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है। पंजाब सरकार ने केंद्र से मांग की है कि वह ऑटोमोबाइल कंपनियों, कृषि वैज्ञानिकों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाए, जो E20 नीति के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों की निष्पक्ष समीक्षा करे। इस प्रस्ताव के पारित होने से अब राष्ट्रीय स्तर पर एथेनॉल मिश्रण नीति पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।