मध्य-पूर्व संकट और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई: अमेरिकी सीनेट ने खारिज किया युद्ध शक्तियां सीमित करने का प्रस्ताव, ईरान पर हवाई हमले जारी

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ वाशिंगटन / काहिरा: मध्य-पूर्व (Middle East) में गहराते सैन्य संकट के बीच अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। जॉर्डन बेस पर हुए हमले के जवाब में अमेरिकी वायुसेना द्वारा उत्तर-पश्चिमी ईरान (ज़ांजान प्रांत) में किए गए हवाई हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के तीन वरिष्ठ कमान अधिकारियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस बीच, वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों को सीमित करने और ईरान पर आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने वाले एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को 49-50 के बेहद करीबी वोट अंतर से खारिज कर दिया है, जिससे अमेरिकी प्रशासन को क्षेत्र में अपने सैन्य अभियान जारी रखने की हरी झंडी मिल गई है।
दूसरी ओर, लाल सागर और भूमध्य सागर में जारी तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने मिस्र के डामिएटा पोर्ट पर एक अमेरिकी गैस स्टोरेज जहाज पर हुए हालिया ड्रोन हमले में अपना हाथ होने से आधिकारिक रूप से इनकार किया है। हूती प्रवक्ता ने कहा कि उनका ध्यान केवल लाल सागर में उन जहाजों तक सीमित है जो इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं। इसी दौरान, कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बुल्गारिया सरकार से अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने बेजमेर एयर बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति न देने का कड़ा आग्रह किया है ताकि युद्ध का दायरा यूरोप तक न फैले।
गाजा पट्टी में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए भी एक समानांतर कूटनीतिक प्रयास जारी है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि एक नई अंतरराष्ट्रीय शांति योजना पर सहमति बन रही है, जिसके तहत हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण (Disarmament) और बंधकों की रिहाई के बदले गाजा में स्थायी युद्धविराम लागू किया जा सकता है। हालांकि, मध्य-पूर्व के मौजूदा सैन्य हालात को देखते हुए इस शांति योजना के जमीनी स्तर पर लागू होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अभी भी संशय व्यक्त कर रहे हैं।



