फर्जी रिमांड आदेश मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, दोषी अधिवक्ताओं और कर्मचारियों पर तत्काल FIR के निर्देश

इंडियन व्यू टीम/ प्रयागराज: न्यायपालिका की शुचिता और गरिमा को अक्षुण्ण रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने एक बेहद गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अधीनस्थ अदालतों में फर्जी और जाली रिमांड आदेश (Fake Remand Orders) तैयार कर अपराधियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को इस पूरे रैकेट में शामिल संबंधित अधिवक्ताओं और कोर्ट कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से जारी कथित रिमांड और जमानत संबंधी आदेशों के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गईं। आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि कुछ वकीलों ने कोर्ट के क्लर्कों और रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके फर्जी सील और जाली हस्ताक्षरों के सहारे रिमांड आदेश तैयार किए और उन्हें जेल प्रशासन को भेज दिया। इस तकनीकी हेरफेर के जरिए कई गंभीर अपराधियों को समय से पहले या बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा था।
न्याय प्रणाली के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं और यदि कानून के रखवाले (अधिवक्ता) और अदालत के कर्मचारी ही इस तरह की जालसाजी में शामिल होंगे, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से विश्वास उठ जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि देश के कानून और न्याय व्यवस्था के खिलाफ एक संगठित अपराध है।
कमेटी करेगी सभी पुराने रिमांड आदेशों की जांच
हाईकोर्ट ने महानिबंधक (Registrar General) को निर्देश दिया है कि वे राज्य की सभी जिला अदालतों में पिछले एक वर्ष के भीतर जारी किए गए रिमांड और रिहाई आदेशों की औचक जांच के लिए एक विशेष विजिलेंस कमेटी का गठन करें। स्थानीय पुलिस को आदेश दिया गया है कि वे इस मामले में शामिल वकीलों के लाइसेंस रद्द करने के लिए बार काउंसिल को भी पत्र लिखें और मामले की प्रगति रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।



