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दतिया उपचुनाव में राजनीतिक घमासान: नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का पुलिस से टकराव, हाईवे किया जाम

अभिषेक सिंह/  दतिया/भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर का असंतोष सड़क पर आ गया है। पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने उपचुनाव में उनके गुट को दरकिनार कर किसी अन्य नेता को टिकट दिए जाने की अटकलों के बाद भारी बवाल काट दिया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि समर्थकों की राज्य पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई और उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (Highway) को घंटों तक जाम कर दिया।

बवाल की असल वजह क्या है?

दतिया सीट नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले आम विधानसभा चुनाव में उन्हें यहां से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। अब दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट के बीच, भाजपा हाईकमान द्वारा किसी नए चेहरे को मौका देने की खबरें स्थानीय मीडिया में जोर पकड़ रही थीं। जैसे ही यह खबर मिश्रा के समर्थकों तक पहुंची, उनका गुस्सा फूट पड़ा। उनका मानना है कि नरोत्तम मिश्रा को किनारे करना स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ धोखा है।

सड़क पर उतरा कार्यकर्ताओं का हुजूम:

गुस्साए सैकड़ों समर्थक दतिया के मुख्य चौराहों पर जमा हो गए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। जब पुलिस ने उन्हें समझाने और सड़क से हटाने का प्रयास किया, तो भीड़ उग्र हो गई।
* झड़प और पथराव: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके जवाब में प्रदर्शनकारियों की ओर से भी धक्का-मुक्की और पथराव की घटनाएं सामने आईं।
* हाईवे जाम: प्रदर्शनकारियों ने ग्वालियर-झांसी नेशनल हाईवे को ट्रैक्टर और बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह से जाम कर दिया, जिससे कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासन और पार्टी का रुख

भारी पुलिस बल की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कड़ी मशक्कत से हाईवे को खाली कराया जा सका। इस मामले में पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और हाइवे जाम करने के आरोप में कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इस घटना ने मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर की गुटबाजी को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव भाजपा के लिए साख का सवाल बन गया है। अब पार्टी आलाकमान पर दबाव बढ़ गया है कि वह डैमेज कंट्रोल (Damage Control) करते हुए ऐसा फैसला ले जिससे गुटबाजी शांत हो सके, अन्यथा कांग्रेस को इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

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