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पीएम मोदी का एक्ट ईस्ट दौरा: भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंध अब ‘रणनीतिक साझेदारी’ में तब्दील

राघवेंद्र प्रताप सिंह / वेलिंगटन/नई दिल्ली: भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को एक नई और आक्रामक धार देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन देशों के विदेशी दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड के साथ ऐतिहासिक समझौते किए हैं। दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों को ध्यान में रखते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक कदम आगे बढ़ाते हुए ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत करने का औपचारिक ऐलान किया है। यह कूटनीतिक जीत हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में भारत की बढ़ती धमक का स्पष्ट संकेत है।

रणनीतिक साझेदारी का क्या अर्थ है?

जब दो देश अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ का नाम देते हैं, तो इसका सीधा अर्थ है कि उनके रिश्ते केवल व्यापार और संस्कृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रक्षा, सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और भू-राजनीतिक मंचों पर एक-दूसरे के गहरे सहयोगी बन गए हैं।

चर्चा के प्रमुख बिंदु और समझौते:

प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर सहमति बनी:
1. समुद्री सुरक्षा (Maritime Security): हिंद-प्रशांत क्षेत्र, विशेषकर दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए दोनों देशों ने नौसैनिक सहयोग बढ़ाने, संयुक्त युद्धाभ्यास करने और समुद्री डकैती (Piracy) के खिलाफ एक साथ लड़ने का संकल्प लिया।
2. रक्षा सहयोग: सैन्य उपकरणों के निर्माण और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान के लिए एक नए रक्षा फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए।
3. व्यापार और निवेश: भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं को फिर से गति देने पर सहमति बनी है। कृषि, डेयरी तकनीक और आईटी सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए विशेष कार्यबल (Task Force) का गठन किया जाएगा।

तकनीक और शिक्षा में सहयोग

न्यूजीलैंड ने भारत के डिजिटल इंडिया और स्पेस प्रोग्राम की सराहना की है। दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, स्पेस रिसर्च और क्लाइमेट चेंज के क्षेत्र में भी करार हुए हैं। इसके अलावा, भारतीय छात्रों और कुशल कामगारों के लिए न्यूजीलैंड के वीजा नियमों को और अधिक सुलभ बनाने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

कूटनीतिक नजरिया

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा बेहद सफल रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अंत में न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते यह दर्शाते हैं कि भारत अब प्रशांत क्षेत्र में केवल एक मूकदर्शक नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ (Global South) का नेतृत्व करते हुए एक सक्रिय ‘सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका निभा रहा है। यह साझेदारी आने वाले दशकों में इस पूरे क्षेत्र की कूटनीतिक दिशा तय करेगी।

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