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नए आपराधिक कानूनों का सुचारू कार्यान्वयन: गृह मंत्रालय ने राज्यों के लिए जारी किया अतिरिक्त फंड

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में देश भर में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के जमीन पर प्रभावी और निर्बाध क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष अतिरिक्त फंड आवंटित किया है, ताकि इन कानूनों को लागू करने में कोई प्रशासनिक या तकनीकी बाधा न आए।

फंड का उपयोग कहाँ होगा?

पुरानी औपनिवेशिक न्याय प्रणाली (IPC, CrPC, IEA) से इस नई, तकनीक-आधारित प्रणाली में जाना एक जटिल प्रक्रिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया यह फंड मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा:
* तकनीकी अपग्रेडेशन: नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (Electronic Evidence), वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-एफआईआर (e-FIR) को अनिवार्य बनाया गया है। इसके लिए थानों और अदालतों में नए कंप्यूटर, सर्वर और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जाएंगे।
* पुलिस और जांच अधिकारियों का प्रशिक्षण: नए कानूनों की धाराओं और जांच की नई प्रक्रियाओं को समझाने के लिए पुलिसकर्मियों, वकीलों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए राष्ट्रव्यापी ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं।
* सीसीटीवी और फॉरेंसिक लैब: क्राइम सीन की वीडियोग्राफी अब अनिवार्य है, इसलिए बॉडी-वॉर्म कैमरे (Body-worn cameras) और मोबाइल फॉरेंसिक वैन की खरीद की जाएगी।

त्वरित न्याय की दिशा में कदम

सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि नए कानून केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि इससे आम जनता को त्वरित (Speedy) और सुलभ न्याय मिल सके।

“नए कानून दंड पर नहीं, बल्कि न्याय पर केंद्रित हैं। राज्यों को दिया गया यह फंड सुनिश्चित करेगा कि हमारी पुलिस और अदालतें इस तकनीकी और कानूनी बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।” – गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी

यह अतिरिक्त आवंटन इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार इस बड़े बदलाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है और राज्यों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है।

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