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नीट-यूजी (NEET UG) धांधली मामला: सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपेगी सीबीआई

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET UG) में कथित पेपर लीक और व्यापक धांधली के मामले ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब अपनी तफ्तीश को एक निर्णायक मोड़ पर ले आई है। सुप्रीम कोर्ट में आगामी अहम सुनवाई के दौरान सीबीआई अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट एक ‘सीलबंद लिफाफे’ (Sealed Cover) में सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है।

क्या हो सकता है सीबीआई की रिपोर्ट में?

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने पिछले कुछ हफ्तों में बिहार, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सघन छापेमारी की है। इस दौरान कई ‘सॉल्वर गैंग’ के सदस्यों और परीक्षा केंद्रों के संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। सीलबंद रिपोर्ट में इन गिरफ्तारियों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (जैसे डार्क वेब के चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन) और इस पूरे रैकेट के पीछे काम कर रहे असली मास्टरमाइंड्स का पूरा कच्चा चिट्ठा होने की संभावना है।

छात्रों का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के हाथ

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अगर परीक्षा की पवित्रता (Sanctity) बड़े पैमाने पर भंग हुई है, तो ‘री-नीट’ (Re-NEET) का आदेश दिया जा सकता है। लेकिन अगर धांधली कुछ विशेष केंद्रों तक सीमित है, तो केवल वहीं के परिणाम रद्द किए जाएंगे।

जांच के प्रमुख बिंदु:

* पेपर लीक का दायरा: क्या प्रश्न पत्र टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया के जरिए परीक्षा से एक रात पहले बड़े पैमाने पर बांटा गया था?
* स्थानीय प्रशासन की भूमिका: क्या परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था (NTA) या स्थानीय पुलिस की तरफ से कोई लापरवाही हुई?
* फंडिंग का रूट: छात्रों से लिए गए लाखों रुपये किस रास्ते से रैकेट के आकाओं तक पहुंचे?

लाखों होनहार छात्र जो दिन-रात मेहनत करके इस मुकाम तक पहुंचे हैं, उनकी निगाहें अब देश की सर्वोच्च अदालत और सीबीआई की इस रिपोर्ट पर टिकी हैं। फैसला जो भी हो, यह भारत की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक ऐतिहासिक नजीर बनेगा।

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