तमिलनाडु में ‘ऑपरेशन लोटस’ की तर्ज पर सियासी भूचाल
CM विजय पर AIADMK विधायकों की 'खरीद-फरोख्त' का गंभीर आरोप, स्टालिन ने खोला सीधा मोर्चा

अभिषेक सिंह/ चेन्नई/नई दिल्ली | द्रविड़ राजनीति के गढ़ तमिलनाडु में इन दिनों एक ऐसा सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है, जिसने दशकों पुरानी राजनीतिक परंपराओं की चूलें हिला कर रख दी हैं। राज्य के मुख्यमंत्री और ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) पर अब एक ऐसा गंभीर आरोप लगा है, जिसे सुनकर राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। हमेशा ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ (स्वच्छ राजनीति) का दावा करने वाले सीएम विजय पर अब ‘ऑपरेशन लोटस’ की तर्ज पर मुख्य विपक्षी दल AIADMK (अन्नाद्रमुक) के विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ (Horse Trading) और सेंधमारी करने का बेहद संगीन आरोप लगा है। इस सियासी उठापटक ने द्रमुक (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन को भी एक बड़ा मौका दे दिया है, जिन्होंने विजय सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और आक्रामक हमला बोला है।
क्या है ‘ऑपरेशन थलापति’ और क्यों टूटने की कगार पर है AIADMK?
चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज (सचिवालय) के गलियारों से जो अंदरूनी खबरें छनकर बाहर आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के कम से कम 10 से 12 असंतुष्ट विधायक सीधे तौर पर TVK के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं। जयललिता के निधन के बाद से ही AIADMK गुटबाजी और नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। सीएम विजय इसी राजनीतिक शून्यता (Political Vacuum) का फायदा उठाना चाहते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता में आने के बाद विजय अब पूरी तरह से ‘हार्डकोर’ राजनेता बन चुके हैं। उनका लक्ष्य AIADMK के असंतुष्ट धड़े को तोड़कर TVK में मिलाना है, ताकि तमिलनाडु में ‘एंटी-DMK’ (द्रमुक विरोधी) वोट बैंक का एकमात्र और निर्विवाद चेहरा सिर्फ और सिर्फ TVK बन सके। विपक्ष ने विजय के इस कथित कदम को ‘ऑपरेशन थलापति’ का नाम दिया है, जो उत्तर भारत में मशहूर ‘ऑपरेशन लोटस’ (विधायकों को तोड़ने की रणनीति) का ही एक दक्षिणी संस्करण प्रतीत हो रहा है।
एम.के. स्टालिन का प्रचंड प्रहार: “लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं विजय”
इस पूरी सियासी उठापटक को DMK प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन बेहद पैनी नजर से देख रहे हैं। AIADMK में हो रही इस कथित टूट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने सीएम विजय पर सबसे तीखा वैचारिक प्रहार किया है। स्टालिन ने कहा, “जो लोग सिनेमाई पर्दे पर और रैलियों में व्यवस्था बदलने और साफ-सुथरी राजनीति का ढोल पीटते हुए सत्ता में आए थे, आज उनका असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो गया है। विधायकों की बोली लगाना और विपक्षी दलों को तोड़ना ‘क्लीन पॉलिटिक्स’ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या है।”
स्टालिन का यह गुस्सा केवल AIADMK के प्रति सहानुभूति नहीं है; इसके पीछे उनका अपना राजनीतिक डर भी छिपा है। DMK यह भली-भांति जानती है कि अगर AIADMK पूरी तरह से खत्म हो गई और उसका काडर TVK में शिफ्ट हो गया, तो विजय भविष्य में DMK के लिए एक ‘अजेय’ राजनीतिक चुनौती बन जाएंगे।
रीढ़विहीन विपक्ष और विजय का ‘मास्टरस्ट्रोक’
अगर एक रणनीतिक विश्लेषक की दृष्टि से देखें, तो यह पूरा प्रकरण यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय अब ‘सिनेमाई हीरो’ के आदर्शवाद से बाहर निकलकर ‘मैकियावेली’ (Machiavelli) की यथार्थवादी और क्रूर राजनीति (Realpolitik) के मैदान में उतर चुके हैं।
तमिलनाडु का इतिहास गवाह है कि यहाँ सत्ता की जंग हमेशा DMK और AIADMK के बीच रही है। लेकिन 2026 के इस दौर में, विजय इस ‘द्विदलीय प्रणाली’ (Bi-party system) को हमेशा के लिए दफन कर देना चाहते हैं। उनका मकसद AIADMK को राजनीतिक नक्शे से इस कदर मिटा देना है कि भविष्य का हर चुनाव केवल ‘TVK बनाम DMK’ हो जाए।
फिलहाल गेंद AIADMK के पाले में है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए अपने कुनबे को बचाना अब अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद ‘हाई-वोल्टेज’ होने वाले हैं। अगर AIADMK के विधायक वास्तव में टूटकर TVK का दामन थामते हैं, तो यह दक्षिण भारत की राजनीति का सबसे बड़ा ‘भूकंप’ साबित होगा।



