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अखिलेश राज में सस्पेंड, योगी सरकार में प्रमोशन

रेत माफिया से पंगा लेने वाली तेजतर्रार IAS दुर्गा शक्ति नागपाल का बढ़ा कद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य में करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। लेकिन इस लंबी तबादला सूची में जिस एक नाम ने पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक हलके का ध्यान अपनी ओर सबसे ज्यादा खींचा है, वह है— 2010 बैच की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS Durga Shakti Nagpal)।

एक समय पर अपने सख्त फैसलों के कारण तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कोपभाजन का शिकार हुईं दुर्गा शक्ति नागपाल को अब योगी सरकार में बड़ा प्रमोशन मिला है। उन्हें पदोन्नत करते हुए देवीपाटन मंडल का नया कमिश्नर (मंडलायुक्त) नियुक्त किया गया है।

2013 का वो चर्चित विवाद और खनन माफिया पर प्रहार

दुर्गा शक्ति नागपाल की इस नई तैनाती को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। वर्ष 2013 में उनका नाम पहली बार राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में तब आया था, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे।

उस दौरान गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में तैनात रहते हुए इस युवा अधिकारी ने अवैध रेत खनन (Illegal Sand Mining) के खिलाफ एक जोरदार अभियान छेड़ा था। उन्होंने यमुना और हिंडन नदियों के खादर क्षेत्र में सक्रिय खनन माफियाओं पर नकेल कसते हुए न सिर्फ करोड़ों की मशीनें जब्त की थीं, बल्कि कई माफियाओं को सलाखों के पीछे भी भेज दिया था।

अखिलेश सरकार का वो विवादित फैसला

खनन माफिया पर की गई यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ उन्हें भारी पड़ गई। अखिलेश सरकार ने एक निर्माणाधीन धार्मिक स्थल की दीवार गिराने से जुड़े एक विवाद का हवाला देते हुए उन्हें अचानक निलंबित (Suspend) कर दिया था।

सरकार के इस फैसले ने पूरे देश में भूचाल ला दिया था। विपक्षी दलों, मीडिया, आम जनता और यहां तक कि आईएएस एसोसिएशन ने भी इस निलंबन को खनन माफियाओं के दबाव में लिया गया एक ‘राजनीतिक कदम’ करार दिया था। देशभर में हुए भारी विरोध और आलोचनाओं के बाद, मजबूर होकर तत्कालीन राज्य सरकार को उसी साल उनका निलंबन वापस लेना पड़ा था।

योगी सरकार का संदेश: ‘ईमानदारी का इनाम’

अब, वर्षों बाद, सूबे में सत्ता की कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में है, जो खुद माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में दुर्गा शक्ति नागपाल को देवीपाटन जैसे महत्वपूर्ण मंडल की जिम्मेदारी सौंपना महज एक रूटीन ट्रांसफर नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति के जरिए योगी सरकार ने एक बहुत साफ और कड़ा संदेश दिया है— “जो अधिकारी बिना किसी डर के कानून का पालन करवाएंगे, सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।” पिछली सरकार में जहां ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें सस्पेंशन का दंश झेलना पड़ा था, वहीं मौजूदा सरकार ने उनकी उसी निडर कार्यशैली को सराहते हुए उन्हें एक बड़े पद से नवाजा है।

लगभग 40 अधिकारियों के इस हालिया तबादले में दुर्गा शक्ति नागपाल का प्रमोशन सुशासन के मोर्चे पर एक सकारात्मक नरेटिव सेट करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अपने नए और बेहद अहम पद पर रहते हुए, देवीपाटन मंडल के विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर यह चर्चित अधिकारी क्या नए कीर्तिमान स्थापित करती हैं।

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