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बिहार में फिर हुआ बड़ा हादसा: भागलपुर में गंगा नदी में समाया विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा, यातायात पूरी तरह ठप

भागलपुर (स्टेट न्यूज़ डेस्क): बिहार (Bihar) में पुलों के ढहने और क्षतिग्रस्त होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सोमवार को भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बने अति-महत्वपूर्ण विक्रमशिला ब्रिज (Vikramshila Setu) का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नदी में समा गया। इस भयानक हादसे ने पूरे राज्य प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस हिस्से पर कोई भारी वाहन या यात्री बस नहीं गुजर रही थी, जिससे एक बहुत बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि, इस घटना के बाद पुल पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।

अचानक भरभरा कर गिरा पुल का हिस्सा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना सोमवार सुबह की है। गंगा नदी के जलस्तर और तेज बहाव के बीच अचानक पुल के एक पिलर के पास वाले स्लैब (Slab) में दरारें दिखीं और देखते ही देखते एक तेज आवाज के साथ पुल का एक बड़ा और भारी-भरकम हिस्सा टूटकर सीधे गंगा की तेज धार में गिर गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय लोग और नाविक दहशत में आ गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।

राहत की बात: कोई बड़ी जनहानि नहीं
प्रशासनिक अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुल के दोनों ओर (भागलपुर और नवगछिया छोर) पर बैरिकेडिंग कर दी है और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। राहत की बात यह है कि प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में किसी की जान नहीं गई है और न ही कोई वाहन नदी में गिरा है। प्रशासन अब ड्रोन कैमरों और नावों की मदद से गिरे हुए मलबे और पुल के बाकी हिस्सों की तकनीकी जांच कर रहा है ताकि किसी अन्य संभावित खतरे का पता लगाया जा सके।

उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क कटा
विक्रमशिला ब्रिज कोई आम पुल नहीं है; यह उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। रोजाना इस पुल से हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन, मालवाहक ट्रक और यात्री बसें गुजरती हैं। पुल का हिस्सा टूट जाने और यातायात पूरी तरह से रोक दिए जाने के कारण दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा भीषण जाम लग गया है। प्रशासन ने फिलहाल छोटे और बड़े वाहनों के लिए अलग-अलग डायवर्जन रूट (Diversion Route) जारी किए हैं, लेकिन इससे यात्रियों को भारी परेशानी और अतिरिक्त दूरी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
इस घटना ने बिहार में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर फिर से गंभीर बहस छेड़ दी है। लोगों के जहन में अभी खगड़िया के अगुवानी-सुल्तानगंज निर्माणाधीन पुल के ढहने की यादें ताजा हैं, और अब चालू हालत में मौजूद विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से जनता में भारी रोष है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार का स्मारक’ करार दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पूरी घटना का कड़ा संज्ञान लिया है और पुल निर्माण निगम के अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी (High-Level Inquiry Committee) का गठन कर दिया है।

प्रशासन की पहली प्राथमिकता फिलहाल यातायात को किसी वैकल्पिक मार्ग से सुचारू करना और पुल की मरम्मत की संभावनाओं को तलाशना है। लेकिन बार-बार टूटते ये पुल केवल ईंट और पत्थर का गिरना नहीं है, बल्कि यह आम जनता के उस भरोसे का टूटना है जो वह सिस्टम पर करती है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट में किसकी लापरवाही सामने आती है और क्या दोषियों पर कोई ठोस और सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।

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